भारत और उज्बेकिस्तान के मध्य द्विपक्षीय बैठक

वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री श्री अब्दुल अजीज कमिलोव व विदेश व्यापार मंत्री श्री एलिओर गनिएव के बीच 23 अगस्त, 2017 को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई।

वाणिज्य मंत्री ने नई दिल्ली में संयुक्त उद्यम, ‘उज्बेक इंडिया ट्रेडिंग हाऊस’ के निर्माण पर प्रसन्नता जाहिर की।वाणिज्य मंत्री ने उज्बेकिस्तान और भारत के मध्य निवेश, वस्तुओं व सेवाओं के व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे व्यापारिक सम्बन्धों को बेहतर बनाने के लिए निजी उद्यमों द्वारा परिचालित संयुक्त व्यापार परिषद (ज्वाइंट बिजनेस काउन्सिल) के गठन का सुझाव दिया। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि विचाराधीन अनुबन्ध मसौदे पर यदि भारत और सीआईएस चैंबर आफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री तथा उज्बेक चैंबर आफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री के हस्ताक्षर हो जाते है और संयुक्त व्यापार परिषद अपना कार्य प्रारम्भ कर देता है तो इससे द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक सम्बन्धों को मजबूती प्रदान करने में बहुत सहायता मिलेगी।दोनों मन्त्रियों ने द्विपक्षीय व्यापारिक सम्बन्धों को मजबूती प्रदान करने में परिवहन तथा लॉजिस्टिक अवसंरचना की आवश्यकता को रेखांकित किया। वाणिज्य मन्त्री ने उज्बेक मन्त्री से आग्रह करते हुए, उन्हे बहुपक्षीय आई.एन.एस.टी.सी समझौते का सदस्य बनने की सलाह दी ताकि उनका देश ईरान होकर अन्तर्राष्ट्रीय ट्रांजिट कार्गो ट्रैफिक की सुविधा का लाभ उठा सके।वाणिज्य मन्त्री ने उज्बेकिस्तान के मन्त्री से चमड़े की बनी वस्तुएं तथा जूतों पर उज्बेकिस्तान में लगने वाले वर्तमान 30 प्रतिशत आयात शुल्क को कम कर के 10 प्रतिशत तक करने का आग्रह किया। भारत में उक्त वस्तुओं का एम.एफ.एन दर 10 प्रतिशत है। उन्होने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान से भविष्य में तैयार चमड़े का आयात कर सकता है। वाणिज्य मन्त्री ने उज्बेक मन्त्री से इंजीनियरिंग मशीनों व अन्य कल पुर्जो पर लगने वाले उच्च आयात शुल्क में भी कमी लाने का आग्रह किया।वाणिज्य मन्त्री ने उज्बेक मन्त्री से अनुरोध किया कि वे कपड़े और तैयार वस्त्रों (30 प्रतिशत तक) तथा आर.एम.जी (31.1 प्रतिशत तक) उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क में कमी लाने और पंजीकरण व प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने पर गम्भीरता से विचार करें। वाणिज्य मन्त्री ने उज्बेक मन्त्री को बताया कि आयात कोटा, लाइसेंस, मूल्य और विदेशी नियन्त्रण, सीमा शुल्क और प्रशासनिक प्रक्रियाएं, कठोर स्वच्छता मानदण्ड तथा सीमा पर पारगमन बन्दी जैसे गैर-टैरिफ रुकावटों के अस्तित्व से अन्तर क्षेत्रीय व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।उजबेकिस्तान के विदेश व्यापार मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि उज़्बेक सरकार विभिन्न प्रक्रियाओं, प्रणालियों और मानदंडों को उदार और सरल बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि निर्यातकों की अधिकांश कठिनाइयां शीघ्र ही हल कर दी जाएंगी।वाणिज्य मंत्री ने उज़्बेक मंत्री से अनुरोध किया कि भारतीय व्यापारियों और पर्यटकों को वीजा देने की प्रक्रिया को और आसान बनाया जाए। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि अगर वीजा के मुद्दे हल हो जाएंगे, तो दोनों देशों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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