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नाटक ‘नेपथ्य में शकुंतला’ का मंचन
एकाग्र ‘गमक’ श्रृंखला अंतर्गत आज संस्कृति संचालनालय द्वारा श्री मनोज नायर द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘नेपथ्य में शकुंतला’ का मंचन हुआ|
नाटक के बारे में –
प्रत्येक मनुष्य अपने आप को श्रेष्ठ समझता है, ओर अपनी क्षमताओं से परे परिणाम चाहता है, श्रेष्ठ तम की खोज में वर्तमान क्षमताओं से पलायन करता है, हर बात से असंतुष्ट, ऐसे ही एक निराशावादी अभिनेता का व्यक्तित्व दर्शाता है ये नाटक ।
मानव नाम का एक अभिनेता शकुंतला नाटक में छोटा सा किरदार निभा रहा है, लेकिन उस किरदार से असंतुष्ट उसी दिन नाटक से पलायन करने का निर्णय लेता है। जाने से पहले वो वहाँ रुक कर बैकस्टेज की प्रॉपर्टी जमाकर वहीं सो जाता है, नाटक के पात्र हिरण, भौरा, मछली, शेर जिनकी मदद से शकुंतला और दुष्यंत का मिलन होता है, मानव को स्वप्न मै ही अनोखे ढंग से समझाते हैं, उसकी क्षमता, खासियत, अंदर छिपी ताक़त को बताते है, और उसे सकारात्मक बोध कराते है, नेपथ्य में चल रहे इन्हीं घटनाओं को उजागर करता है नाटक “नेपथ्य में शकुंतला”
मंच पर
अलय खान, अभी श्रीवास्तव, स्मिता नायर, नेनी जवांश, राहुल तिवारी, अनुश्री जैन, आदर्श ठस्सू, मिलिंद दाभाडे, दीपिका मैथिल, सोनू, अनंत एवं आयुष भान अभिनय किया|
मुख्य थीम संगीत- मेघदीप बॉस, संगीत मंडली- अमर सिंग, सुनील, मिलिंद, कोरस में- श्रेया, आस्था, अंश एवं जयंत, मुखौटे- हर्षवर्धन कड़वे, मंच पर मधुबनी पेंटिंग- रश्मि आचार्य, प्रकाश परिकल्पना- धन्नूलाल सिन्हा की और संगीत संचालन सुमित सिंग चंदेल का था|
शैडो ग्रुप की स्थापना वर्ष 2001 में हुई, रंगमंच की चली आ रही परंपराओं और ठहरे बिंबो की परिधियों से बाहर निकलकर प्रयोग की नई संभावना के प्रतीक के रूप में “शैडो थियेटर ग्रुप” ने अपनी रंग अभिव्यक्ति के लिए अभिनय की सबसे कठिन विधा माईम यानी मूक अभिनय को चुना इस विधा में काम और प्रयोग करने वाला यह मध्य प्रदेश का एकमात्र समूह है।
इसने ना केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी जाकर इस विधा पर व्याख्यान, कार्यशालाओं और प्रदर्शनों के सिलसिले को बरकरार रखा है। देश के प्रतिष्ठित रंग आयोजन स्पीक मैके, एन. टी. पी. सी . म. प्र नाटय विद्यालय, के. आर. नारायण फिल्म इनस्टीटूयट, निफ्ट, काला घोड़ा मुबंई , रंगआधार नाट्य समारोह, इफतेखार नाट्य समारोह, के साथ-साथ अपने वार्षिक आयोजन के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचायी है।
परछाईयां, थर्ड-पलेग, निठारी, के साथ सआदत हसन मंटो की कहानी जेबकतरा, जापानी लेखक चिओमी हारा की कहानी आइना, मैकबेथ और वाल्मिकी रामायण को माइम में प्रस्तुत करना विशेष उपलब्धि रही है।
वर्तमान मे आगिंक और वाचिक के प्रयोग के साथ नये प्रस्तुतियों का भी निर्माण किया जिसमें आकार का हमारे जीवन में हस्तक्षेप को लेकर नाटकों का निर्माण और उनका मंचन जैसे नाटक बाक्स , लोस्ट ऐंगल, बिग बेंग नेपथ्य में शकुनतला, अक्सर, अस्तित्व, साथ ही कविता और अभिनय कि श्रृंखला में कविता में दृश्यो का प्रभाव और अभिनय के साथ प्रस्तुतियां जैसे ताना बाना, कविता यात्रा अन्तर्लय, होली, हमारी सारी दुनिया, बालगीत, थोड़ा सा एकांत, प्रस्तुतयिां आदी तैयार किये है ।
गमक के अंतर्गत 13 दिसंबर को श्री विशाल सिंह कुशवाहा के निर्देशन में नाटक “पार्क” का मंचन होगा। नाटक के लेखक प्रख्यात अभिनेता और नाटककार मानव कौल हैं। यह प्रस्तुति उज्जैन की संस्था कला चौपाल सांस्कृतिक सामाजिक समिति द्वारा की जाएगी।




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