बुनियादी साक्षरता से जोड़े गये 52 लाख से अधिक नव-साक्षर

प्रदेश में साक्षर भारत योजना के अंतर्गत अब तक करीब 52 लाख 23 हजार नव-साक्षरों को बुनियादी साक्षरता से जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही, साक्षर भारत योजना में नव-साक्षरों को प्रदेश में संचालित स्वच्छता अभियान, जनधन योजना, लाड़ली लक्ष्मी, जीवन ज्योति और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं से जोड़ा गया है। अभियान के दौरान नव-साक्षरों को शिक्षा के प्रति जागरूक भी किया गया है, जिससे शाला त्यागी बच्चों का प्रतिशत कम हुआ है।

प्रदेश में साक्षर भारत योजना की शुरूआत वर्ष 2009 में की गई थी। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार 42 जिलों में, जहाँ महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत से कम थी, वहाँ यह योजना लागू की गई। योजना की परिधि में ग्रामीण महिलाओं, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ ऐसे समूह जोड़े गये, जिन्हें विकास के पर्याप्त अवसर नहीं मिले थे। प्रदेश के आदिवासी जिलों में प्रमुखता के साथ साक्षरता परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग और केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के साक्षरता विभाग द्वारा संयुक्त रूप से योजना का क्रियान्वयन किया गया। प्रदेश में अब तक 8 नव-साक्षर परीक्षा आयोजित की जा चुकी हैं।

श्रेष्ठ कामों के लिए मिले पुरस्कार

साक्षर भारत योजना में मध्यप्रदेश को वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में तीन पुरस्कार मिले। सर्वश्रेष्ठ राज्य का सम्मान राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग के राज्य शिक्षा केन्द्र को प्राप्त हुआ। सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार जिला लोक शिक्षा समिति जिला टीकमगढ़ को तथा सर्वश्रेष्ठ राज्य संसाधन केन्द्र के लिए राज्य संसाधन केन्द्र इन्दौर को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रदेश के 31 सांसद आदर्श ग्रामों में 24 हजार प्रौढ़ निरक्षर नव-साक्षर बनकर सामने आए हैं।

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