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बुदनी विधानसभा में 50 साल में चार बार कांग्रेस जीती, दिग्विजय ने वहां ली मंडलम-सेक्टर की बैठक
मध्य प्रदेश की राजधानी से सटे सीहोर जिले के बुदनी विधानसभा क्षेत्र में पिछले 50 साल में चार बार कांग्रेस के विधायक रहे हैं जिनमें सबसे ज्यादा मत हासिल करने वाले चौहान सिंह रहे हैं। इसके बाद करीब 60 प्रतिशत लोगों को वोट लेने का रिकॉर्ड वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनाया है जिसे विराम देने के लिए अब कांग्रेस ने वहां के संगठन को मजबूत करने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उतारा है। आज वे बुदनी विधानसभा क्षेत्र के रेहटी कस्बे में पहुंचे थे जहां मंडलम-सेक्टर की बैठक में जीत का संकल्प लिया गया।
बुदनी विधानसभा सीट पर 50 साल में 11 विधानसभा चुनाव हुए हैं जिनमें से कांग्रेस को चार बार तो जनता पार्टी व भाजपा को छह बार विजय हासिल हुई है। शालिगराम वकील यहां दो बार चुनाव जीते थे जिसमें एक बार वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 1972 में चुनाव लड़े थे। शिवराज यहां से चौथी बार चुनाव जीते हैं। वे सबसे पहले 1990 में यहां से चुनाव लड़े थे और तब डाले गए वैध मतों के 59 प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस के हरिसिंह से जीते थे। इसके बाद 2008 में उन्हें 62, 2013 में 69 तो 2018 में 60 फीसदी से ज्यादा मत मिले। पिछले दो चुनाव में तो कांग्रेस को प्रत्याशी तलाशने में मुश्किल हुई और आखिरी समय में नेताओं को राजी किया गया। 2013 में डॉ. महेंद्र सिंह तो 2018 में अरुण यादव को उनके खिलाफ उतारा गया लेकिन दोनों प्रत्याशी कोई कमाल नहीं कर सके। इस बार कांग्रेस यहां से कोई भी प्रत्याशी बनाए लेकिन उसके पहले अपने संगठन को मजबूत करने के लिए मैदान उतरी है।
दिग्विजय सिंह ने रेहटी में बैठक ली
चुनाव की तैयारियों के तहत सीएम के विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने इस बार रणनीति के तहत मंडलम-सेक्टर को सशक्त बनाने की कवायद शुरू की है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस की कमजोर सीटों पर जा रहे हैं और बुदनी में आज वे पहुंचे। वहां उन्होंने मंडलम-सेक्टर की बैठक ली तथा उसमें मौजूद बुदनी के तीन पूर्व प्रत्याशियों राजकुमार पटेल, देवकुमार पटेल, महेश सिंह राजपूत भी मौजूद थे। राजकुमार व देवकुमार जब चुनाव लड़े तब तो विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान नहीं थे लेकिन महेश सिंह राजपूत ने तो उनके खिलाफ 2008 का चुनाव लड़ा था। मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल खत्म होने के बाद वे बुदनी से विधानसभा चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के महेश सिंह ने 28 फीसदी से ज्यादा वोट लेकर उन्हें टक्कर दी थी। इस बार कांग्रेस को सीएम चौहान के खिलाफ प्रत्याशी तलाशने के साथ मतदान केंद्रों पर अपने कार्यकर्ताओं के लगातार उपस्थित रहने की रणनीति को भी कारगर बनाने की चुनौती है।




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