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बिना बताए गर्भपात पति का मानसिक उत्पीड़न
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि चिकित्सीय कारणों के बगैर पत्नी द्वारा अपनी मर्जी से गर्भपात कराना पति का मानसिक उत्पीड़न है। साथ ही तलाक को मंजूरी देने के लिए पर्याप्त आधार भी। हाईकोर्ट ने 11 साल पहले शादी के बंधन में बंधे दंपति के तलाक को मंजूरी दे दी। जस्टिस सिद्धार्थ लूथरा और दीपा शर्मा की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ‘बिना किसी चिकित्सीय कारणों के पति की बगैर जानकारी के कोई महिला गर्भपात करा लेती है तो वह उनका (पति) मानसिक उत्पीड़न है। इसी तरह यदि कोई पुरुष पत्नी को बताए बगैर अपनी नसबंदी करा लेता है तो यह पत्नी का मानसिक उत्पीड़न माना




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