फायर के जांबाजः वेतन सात हजार उठा रहे जान का जोखिम, करते हैं रेस्क्यू

भोपाल शहर में मकान-फ्लैट में धधकती आग के बीच जाकर रेस्क्यू करने से लेकर टावर पर चढ़े लोगों को सुरक्षित नीचे उतारने में पुलिस व प्रशासन की मदद करने वाले नगर निगम के फायर कर्मचारियों को एक माह का बमुश्किल सात हजार रूपये वेतन मिलता है। लंबे समय से ये रिस्क अलाउन्स की मांग कर रहे हैं। लेकिन इन्हें नहीं दिया जा रहा है।

नगर निगम दैनिक वेतनभोगी की तरह इन्हें रखता है। जबकि सभी के पास अनुभव व फायर शाखा में काम करने के लिए प्रमाण पत्र भी है। शहर में जलभराव हो या आगजनी, पेड़ गिरने से लेकर अन्य कामों के लिये भी ये लोग हमेशा काम करने को तैयार रहते हैं। मामले में आयोग ने आयुक्त, नगर निगम, भोपाल से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। आयेाग ने नगर निगम आयुक्त से पूछा है कि 01. नगर निगम में कुल कितने फायर कर्मचारी हैं ? 02. ये कर्मचारी कब से (कितने समय से) काम कर रहे हैं ? 03. ये कर्मचारी नियमित हैं या दैनिक वेतनभोगी या संविदा या और कुछ ? 04. इन्हें रिस्क अलाउन्स मिल रहा है या नहीं ? 05. इन पर कौन से नियम लागू होते हैं ?
सागर में पुलिस की प्रताड़ना से युवक ने खाया जहर, उपचार के दौरान मौत
एसपी सागऱ चार सप्ताह में दें जवाब
सागर जिले 
की जरूआखेड़ा चैकी क्षेत्र के दौड़ा गौतमिया गांव में जहर खाकर अस्पताल पंहुचे युवक की इलाज के दौरान सोमवार को मौत हो गई। युवक ने मौत से पहले पुलिस को दिये गये बयान में जरूआखेड़ा थाना पुलिस पर गम्भीर आरोप लगाए थे। मौत से पहले युवक रवि ने मीडिया को भी बताया था कि चैकी प्रभारी राज की प्रताड़ना से बेहद त्रस्त है। उसने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की थी, जिसके बाद चैकी प्रभारी ने उसे चैकी में बुलाया था। वहां फिर से प्रताड़ना मिलने की आशंका के चलते उसने सल्फास की गोलियां खा लीं। मृतक रवि के पिता का आरोप है कि पुलिस ने उसके बेटे पर मारपीट का झूठा मुकद्मा बनाया, जबकि वास्तविकता यह है कि आरोपी इंदर चैधरी उसकी बेटी को परेशान करता था, जिससे उसके बेटे रवि ने इंदर को ऐसा करने से मना किया था। मामले में आयोग ने पुलिस अधीक्षक, सागऱ से चार सप्ताह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है।
दस मिनट की कहकर एम्बुलेंस ने कराया घंटों इंतजार, गर्भवती ने ट्रेक्टर-ट्राली में जन्मा बच्चासीएमएचओ पन्ना तीन सप्ताह में दें जवाब
पन्ना जिले में
 28 साल की एक गर्भवती महिला ने ट्रेक्टर-ट्राली में बच्चे को जन्म दिया है। मामला अजयगढ़ तहसील से 10 किलोमीटर दूर देवगांव का है। मध्यप्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिये जननी एक्सप्रेस नाम से एम्बुलेंस सेवा शुरू की है। लेकिन इसका फायदा जरूरतमंद महिलाओं को कितना मिल पा रहा है, इसकी बानगी अजयगढ़ तहसील के देवगांव में देखने को मिली। जानकारी के मुताबिक, 10 मिनट में आता हंू कहकर एम्बुलेंस चालक ने घंटों इंतजार कराया, लेकिन फिर भी नहीं आया। जब एम्बुलेंस के आने की कोई संभावना नजर नहीं आई, तो महिला को ट्रेक्टर-ट्राली में ही अस्पताल ले जाया गया। गर्भवती महिला के रिश्तेदार संतराम पटेल ने बताया कि तहसील मुख्यालय से हमारा गांव करीब 10 किलोमीटर दूर है। गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिये अस्पताल ले जाना था। इसके लिए दोपहर में करीब एक बजे चार बार 108 नंबर पर एम्बुलेंस के लिए फोन किया। हमें बताया गया कि 10 मिनट में आ जायेंगे। लेकिन दो घंटे इंतजार करने के बाद एम्बुलेेंस नहीं पंहुची। इसके बाद हमें मजबूरी में ट्रेक्टर-ट्राली से महिला को अस्पताल ले जाना पड़ा। लेकिन महिला ने बीच रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया। मामले में आयोग ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), पन्ना से तीन सप्ताह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। 

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