पोषण आहार में कांग्रेस ने भ्रम फैलाने की कोशिश की, सीएम ने विधानसभा के भीतर और बाहर कहा

मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान ने पोषण आहार को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इसके तहत कांग्रेस ने भ्रम फैलाने की कोशिश की। सदन के अंदर वक्तव्य देना सरकार का अधिकार है लेकिन विपक्ष को इस पर भी दिक्कत है। जबकि विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति लेकर इस पर वक्तव्य देने का फैसला किया था। मगर कांग्रेस को चर्चा से भागना था और वक्तव्य के बीच उन्होंने सदन के भीतर हंगामा किया। वहीं, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के वक्तव्य भाषण के बीच गर्भगृह के पास धरना दिया। इससे कार्रवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में वक्तव्य देने के बाद मीडिया से चर्चा में कहा कि टेक होम राशन के परिवहन में वाहन स्कूटर, मोटर साइकल, कार कमलनाथ सरकार के कार्यकाल हैं। उनकी भी जांच करेंगे। टेक होम राशन में अमानक स्तर का पाया गया था, वह भी कमलनाथ सरकार के कार्यकाल का है जिसका भुगतान रोक दिया गया है। सभी तथ्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। उसके आधार पर अंतिम कार्रवाई होगी।
पोषण आहार कांग्रेस ने 2018 के फैसले को बदला
2018 भाजपा सरकरा ने तय किया था कि पोषण आहार महिला स्व सहायता समूहों को देंगे और पोषण आहार संयंत्र बनाने का फैसला किया। संयंत्र भी बन गए लेकिन बाद में कांग्रेस की सरकार आई। कैबिनेट का फैसला करके उसे वापस एमपी एग्रो के नाम पर ठेकेदारों को सौंपने का षड़यंत्र किया। इस फैसले के बाद आईएएस गौरीसिंह ने इ्स्तीफा दिया, यह सवाल सामने है। मगर हमारी सरकार वापस आने पर फिर महिलाओं के स्व सहायता समूह को सौंपा।
अभी ड्राफ्ट रिपोर्ट, अंतिम नहीं
2018 से 2021 के बीच महिला बाल विकास का ऑडिट किया था जिसमें 2019-20 शामिल है। यह ड्राफ्ट रिपोर्ट है जिसे अंतिम नहीं माना जा रहा है। ऑडिट की प्रक्रिया कांग्रेस के नेता भी जानते होंगे और उन्हें पता होगा कि ऑडिट की टीम अपने अनुभव को विभाग को जानकारी देती है। अभी उनकी ड्राफ्ट रिपोर्ट है और फिर सीएजी को यह जाएगी। सूक्ष्म जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
सीएम ने कहा जिसे सीएजी की रिपोर्ट कहा जा रहा वह ड्राफ्ट रिपोर्ट
सीएम चौहान ने कहा कि जिस रिपोर्ट को विपक्षी मित्रों द्वारा सीएजी (कम्पट्रोलर एण्ड ऑडीटर जनरल ऑफ इण्डिया) की रिपोर्ट बताया जा रहा है, वह दरअसल सीएजी की रिपोर्ट है ही नहीं। यह केवल एक ड्राफ्ट रिपोर्ट है, जो कि मध्यप्रदेश के महालेखाकार यानी एजी ऑफिस द्वारा तैयार की गई है। इस ड्राफ्ट रिपोर्ट में जो
ड्राफ्ट रिपोर्ट शाला त्यागी बालिकाओं पर सीएम बोले
सीएम ने कहा कि ड्राफ्ट रिपोर्ट का एक मुख्य बिंदु शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को लेकर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेस लाइन सर्वे नहीं किया। साथ ही विभाग ने स्कूल में पढ़ाई नहीं कर रही किशोरी बालिकाओं की संख्या 36 लाख बताई, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार यह आंकड़ा 9 हजार है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने शाला त्यागी बालिकाओं की संख्या 5.51 लाख स्वीकार की है। वास्तविकता यह है कि ऑडिटर ने जो 36 लाख का आंकड़ा बताया है, वो मध्यप्रदेश की 11 से 14 वर्ष की किशोरी बालिकाओं की कुल संख्या है, न कि शाला त्यागी बालिकाओं की। सरकार ने 11 से 14 वर्ष की किशोरी बालिकाओं का बेस लाइन सर्वे कर रिपोर्ट सितंबर, 2018 में भारत सरकार को भेजी थी। रिपोर्ट में किशोरी बालिकाओं की संख्या कुल 2 लाख 52 हजार थी। वर्ष 2018 से वर्ष 2021 की अवधि के लिए हितग्राही बालिकाओं की कुल संख्या 5.51 लाख ही है।
पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव पर कांग्रेस को घेरा
सीएम ने पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव को लेकर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 7 जिलों- धार, सागर, मण्डला, देवास, नर्मदापुरम, रीवा एवं शिवपुरी में 7 पोषण आहार संयंत्रों का निर्माण 60 करोड़ रुपए की लागत से कराया गया। दिसंबर, 2018 में कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर पोषण आहार व्यवस्था में निजी फर्मों की भागीदारी के प्रयास शुरू हुए। कांग्रेस सरकार ने नवम्बर, 2019 में निर्णय लिया कि ये संयंत्र महिला स्व-सहायता समूहों से वापस लेकर पुनः एमपी एग्रो को दे दिए जाएं। इस निर्णय के परिणामस्वरूप फरवरी, 2020 में एमपी एग्रो ने सभी पोषण आहार संयंत्रों को आधिपत्य में ले लिया। इस प्रकार पोषण आहार व्यवस्था को माफिया मुक्त रखने और स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने के हमारे निर्णय को बदल दिया। मार्च, 2020 में फिर सरकार में वापस लौटे तो सितंबर, 2021 में ये निर्णय किया कि सभी पोषण आहार संयंत्र महिला स्व-सहायता समूहों के परिसंघों को फिर से सौंप दिए जाए। सभी 7 संयंत्र नवम्बर, 2021 से फरवरी, 2022 के बीच राज्य आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को सौंप दिए। इन समूहों को 141 करोड़ रुपए की राशि एडवांस दी गई ताकि वे व्यवस्थित रूप से इन संयंत्रों का संचालन शुरू कर सकें। आज इन संयंत्रों का टेक होम राशन प्रदाय से लगभग 750 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का टर्न ओवर है।
पोषण आहार का स्कूटर-कार से परिवहन पर सीएम ने कहा
ड्राफ्ट आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पोषण आहार का परिवहन ऐसे वाहनों से किया गया है, जिनके नम्बर किसी कार, स्कूटर या ट्रेक्टर के है या फिर वह नम्बर पोर्टल पर उपलब्ध ही नहीं हैं। ड्राफ्ट रिपोर्ट के साथ 84 चालानों का उल्लेख है, जिनमें उपयोग किए गए वाहन ट्रक के रूप में नहीं बल्कि अन्य किसी वाहन के रूप में पंजीकृत है अथवा जिनका ब्यौरा परिवहन के पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है। ध्यान देने योग्य बात ये है कि इन 84 चालानों में से 31 चालान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से संबंधित है। पिछली सरकार के कार्यकाल में परिवहन में उपयोग किए गए क्रमांक JHOS BA 0511 का वाहन रिपोर्ट के अनुसार मोटर साईकिल बताया गया है। इसी प्रकार क्रमांक MP04-HA-0225 और क्रमांक MP09 HE 4058 वाहन कार के नम्बर है, ऐसा बताया गया है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का एक और उदाहरण पांच अक्टूबर 2019 को जारी चालान से एक वाहन क्रमांक RJ17 GB-0877 का भी आडिट के अनुसार रिकार्ड नहीं पाया गया है। हमने सत्यापन कराया तो पता चला कि इस वाहन का सही नम्बर दरअसल RJ11 GB-0877 है, जो कि वास्तव में एक ट्रक है।

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