पेयजल योजनाएं आत्मनिर्भर बनें: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि पेयजल योजनाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए और उनके क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संसाधन जुटाए जाएं। नाथ ने आज मंत्रालय में मध्यप्रदेश जल निगम के संचालक मंडल की बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री सुखदेव पांसे, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल एवं नगरीय विकास मंत्री श्री जयवर्द्धन सिंह उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि पेयजल योजनाओं के संचालन और संधारण की लागत का विश्लेषण किया जाना चाहिए और उन्हें स्वयं के वित्तीय स्रोतों के जरिए संचालित करने का प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आगामी ग्रीष्म ऋतु के दौरान आम नागरिकों के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
श्री नाथ ने निर्माणाधीन योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि नई जल परियोजनाओं के सभी प्रस्ताव समयबद्ध कार्यक्रम के साथ प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही उसके अनुसार योजनाएं पूरी हों यह भी सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने नई योजनाओं की वित्तीय रूपरेखा बनाने में अनुभवी संस्थाओं की सेवाएं लेने कहा।
प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री संजय शुक्ला ने भारत सरकार के जलजीवन मिशन के प्रावधानों की जानकारी संचालक मंडल की बैठक में दी।
बैठक में मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री एम.गोपाल रेड्डी, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मनोज श्रीवास्तव उपस्थित थे।
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जौहरी सहमति के साथ पैनल भेजकर सिंह की डीजीपी नियुक्ति कनफर्म करेगी सरकार

  • मुख्यमंत्री कमलनाथ से डीजीपी वीके सिंह की देर शाम मुलाकात, संतुष्ट नजर आए डीजीपी
    भोपाल। नवदुनिया स्टेट ब्यूरो
    मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक पद को लेकर मची उहापोह की स्थिति सोमवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को दूसरी बार पैनल भेजे जाने के बाद सामान्य हो पाएगी। वहीं, डीजीपी वीके सिंह की मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात के बाद यह साफ होता दिखाई दे रहा है कि सरकार उन्हें हटाने के मूड में नहीं है। हालांकि यूपीएससी की प्रदेश के डीजीपी को लेकर होने वाली अगली बैठक तक तस्वीर साफ होना मुश्किल है और सिंह के विरोधियों द्वारा उन्हें हटाकर डीजीपी की कुर्सी पर अन्य किसी अपने शुभचिंतक को बैठाने की कोशिशें जारी रहेंगी।
    सूत्रों के मुताबिक पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह को हटाए जाने को लेकर चल रही कोशिशों को शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से उनकी मुलाकात के बाद धक्का लगा है। सिंह की मुख्यमंत्री के साथ करीब 15 मिनट की मुलाकात रही। इसके बाद उनकी बॉडीलैंग्वेज से यह लगा कि वे संतुष्ट हैं। उन्हें यह इशारा मिल गया है कि उन्हें उऩकी ही सरकार ने बनाया था तो वे हटाएंगे नहीं। यूपीएससी की पैनल में जो भी कमी रह गई है, उसे सुधार कर दूसरी बार पैनल भेजकर यूपीएससी से डीपीसी कराकर नियुक्ति को लगातार कराएंगे।
    सूत्रों का कहना है कि डीजीपी पद के लिए प्रमोशन को लेकर यूपीएससी ने जो पैनल भेजा था, उसमें जौहरी की लिखित सहमति नहीं होने से राज्य शासन ने यूपीएससी के पैनल वीके सिंह, विवेक जौहरी और मैथलीशरण गुप्त को निरस्त कर दिया था। इससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि राज्य शासन वीके सिंह को डीजीपी से हटाकर दूसरे आईपीएस को डीजीपी बनाना चाहती है। इसमें हनीट्रैप की एसआईटी के प्रमुख व सायबर पुलिस के मुखिया राजेंद्र कुमार का नाम दौड़ मेें सबसे आगे बताया जा रहा था।
    यूपीएससी की डीपीसी पर पूरा दारोमदार
    डीजीपी के लिए अब दूसरी बार डीपीसी होना है जिसके लिए यूपीएससी को बैठक बुलाना है। डीपीसी की तारीख अगर 29 फरवरी के बाद की गई यानि 1 मार्च को की गई तो राजेंद्र कुमार का नाम डीपीसी के लिए फिट नहीं रहेगा। राजेंद्र कुमार का रिटायरमेंट अगस्त में है और डीजीपी के लिए कम से कम छह महीने का सेवाकाल शेष रहना जरूरी है।
    अब आगे क्या
  • सोमवार को राज्य शासन डीजीपी की डीपीसी के लिए फिर से पैनल भेजेगी।
  • यूूपीएससी को डीपीसी की तारीख तय करेगी। इसके बाद छह महीने या इससे ज्यादा के सेवाकाल वाले अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

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