पूर्व छात्रों ने DigiLEP ग्रुप बनाया

जहाँ एक ओर सम्पूर्ण विश्व वैश्विक महामारी ‘कोरोना(कोविड-19)’ के भीषण प्रकोप से बचने के लिये एकजुट होकर संघर्षरत है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग अपने नौनिहालों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए DigiLEP व्हाट्स एप ग्रुप्स और रेडियो स्कूल जैसे विशेष कार्यक्रम प्रारंभ कर इन कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शैक्षिक नियमितता को बनाये रखने के लिये कई नवाचार कर रहा है। 

इन शैक्षिक कार्यक्रमों का संचालन दूरस्थ इलाकों में सुचारू रूप से हो चुका है। लोग खुद जुड़ रहे हैं, जैसा कि शहडोल जिले के जरवाही कस्बे में हुआ। शिक्षकों को व्हाट्स एप ग्रुप्स बनाने और उसके संचालन में कठिनाई आयी तो, कुछ भूतपूर्व छात्रों ने यह जिम्मदारी ले ली। जिनकी रुचि पढ़ाई में होने के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में भी थी। शिक्षकों ने ग्रुप में उन्हें एडमिन बनाया, सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 10-10 बच्चों के घर जाकर उनके व्हाट्स एप नम्बर उस ग्रुप में जोड़ने को कहा। आश्चर्य तो तब हुआ जब, पूर्व छात्रों के सहयोग से, कुछ ही घंटों में गांव के अधिकांश बच्चे ग्रुप में जुड़ गए। गांव में अब तक ये खबर फैल चुकी थी कि अब मोबाइल से भी पढ़ाई होगी। यह देख अन्य छात्र भी स्वयं ही ग्रुप से जुड़ गए।

प्रतिदिन कक्षावार, विषयवार अध्ययन सामग्री इन व्हाट्स एप ग्रुप्स में आने लगी। सभी बच्चे प्रतिदिन दिए गए लिंक से संबंधित विषयवस्तु को अच्छी तरह समझते, उससे संबंधित प्रयोग करते, उसके मुख्य बिंदुओं को कॉपी में नोट करने के साथ ही, पढ़ते समय का फोटो और वीडियो ग्रुप में शेयर कर, कठिन बिंदुओं को ग्रुप में ही अपने शिक्षकों से पूछने लगे। इस संकट की घड़ी में भी पूरे गांव में शिक्षा का माहौल बन गया। गांव की कम पढ़ी-लिखी महिलायें भी खाली समय में अपने बच्चों से प्रतिदिन की पढ़ाई के बारे में और उनसे संबंधित प्रश्नों को पूछने लगीं और ऐसा करते हुए उन्होंने अपना वीडियो बनाया और ग्रुप में शेयर भी किया। छात्रों के ऐसे उत्साह को देख शिक्षक भी आगे आए। उन्होंने भी खुद से कॉपी में विषयवस्तु को सरलतम रूप में समझाते हुए कठिन बिंदुओं को सरल करते हुए वीडियो शेयर करना प्रारंभ कर दिया। प्रतिदिन शिक्षकों द्वारा छात्रों को फ़ोन कर उनके दैनिक शैक्षिक गतिविधियों पर चर्चा की जाने लगी। कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के दौरान एक दिन की विषयवस्तु तापमापी, उसके कार्य और उनके प्रकार के बारे में शिक्षक ने एक सरलतम लिंक भेजी और प्रत्येक छात्र से इसमें कुछ नया करने को कहा।

आश्चर्य की बात है कि उसी दिन कुछ ही घंटों बाद कई छात्रों ने विभिन्न प्रकार से तापमापी यंत्रों का निर्माण अपने घरों में ही कर लिया और उसे बनाते हुये, प्रयोग करते हुए, स्वयं की फ़ोटो और वीडियो शेयर की। इसी प्रकार विज्ञान की विभिन्न विषय-वस्तु जैसे ऊष्मा संचरण, रक्तचाप, द्रव्यमान एवं भार और गणित में भिन्न की पहचान एवं उन्हें व्यक्त करना, भिन्नों के जोड़, अंकों की संक्रियाएँ आदि का सरलतम अध्ययन छात्रों ने करना प्रारंभ कर दिया है। साथ ही विद्यार्थी रेडियो स्कूल कार्यक्रम का भी भरपूर लाभ उठा रहे हैं। उसमें प्रतिदिन प्रसारित ज्ञानप्रद जानकारियों और शिक्षाप्रद कहानियों को रेडियो या मोबाइल ऐप के माध्यम से सुन रहे हैं तथा उसके मुख्य बिंदुओं को प्रतिदिन कॉपी में नोट कर रहे हैं।

इन विषम परिस्थितियों में भी 43 DigiLEP JARWAHI group और इस रेडियो स्कूल कार्यक्रम ने न केवल गाँव के बच्चों की शैक्षिक नियमितता को जारी रखा है बल्कि उनके अंदर नवीन सोच और प्रायोगिक क्षमता को उभारने में एक अभूतपूर्व सहयोग किया है।

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