पूरे देश में अनेकता में एकता का प्रतीक है मप्र: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश पूरे देश में अनेकता एकता का प्रतीक राज्य है। यहाँ सभी धर्मों, जातियों, भाषाओं के लोग निवास करते हैं, जो प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेशवासियों के साथ मिलकर विकास का एक ऐसा नक्शा बनाएं, जो आने वाले दस वर्ष में पूरे देश में हमारे प्रदेश को अव्वल राज्य के रूप में स्थापित करे। कमल नाथ मध्यप्रदेश के 64वें स्थापना दिवस पर लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित राज्योत्सव समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि 64 साल पहले की और आज से दस साल पहले की चुनौतियाँ कुछ और थीं तथा आज की चुनौतियाँ कुछ और हैं। उन्होंने कहा कि हमें नए संदर्भों में और परिवर्तनों के साथ एक सुदृढ़, खुशहाल और समृद्ध मध्यप्रदेश का निर्माण करना है। कृषि के क्षेत्र में हुई उन्नति का लाभ किसानों को मिले, नौजवानों को उनकी नई सोच के अनुरूप रोजगार मिले, इसके लिए नए सिरे से प्रयास करने की आवश्यकता है। श्री कमल नाथ ने कहा कि आज शिक्षा और कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन करने की जरूरत है। आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ने की जरूरत है क्योंकि यही वह ताकत है, जो पूरे देश को विभिन्नताओं के बीच एक झण्डे के नीचे खड़ा करती है। उन्होने कहा कि हमारी इस शक्ति को पूरी दुनिया मानती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रदेश किसी एक पार्टी, जाति और धर्म का नहीं है। यह हर उस व्यक्ति का प्रदेश है, जो यहाँ पर निवास करता है।

संस्कृति मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल है। यहाँ सभी संस्कृतियों का वास है, जो एक गुलदस्ते के रूप में अपने विविध रंगों और खुशबुओं से प्रदेश को आलोकित करती हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि हमारे प्रदेश में हर संस्कृति का विकास हो, प्रत्येक विचारधारा का सम्मान हो। डॉ. साधौ ने स्वर्गीय पिता श्री सीताराम साधौ का स्मरण करते हुए कहा कि वे मध्यप्रदेश के निर्माण के पूर्व और बाद भी विधायक रहे। आज मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर संस्कृति मंत्री के रूप में इस मंच पर हूँ। पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के पास अकूत संपदा है, जो इस प्रदेश के विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर मिलजुलकर काम करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर आने वाले वर्ष को गोंड कला वर्ष घोषित किया और इसके प्रतीक चिन्ह का विमोचन किया।प्रारंभ में गोंड कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। उत्सव में सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक एवं गायक श्री अमित त्रिवेदी ने आकर्षक प्रस्तुति दी। उस्ताद गुलाम साबिर निजामी बन्धु ने सूफी कव्वाली प्रस्तुत की।

इस मौके पर जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुरेश पचौरी, विधायक श्री विश्वास सारंग, श्री रामेश्वर शर्मा, मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहन्ती एवं वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

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