जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र पुतुल समारोह के समापन दिवस पर 24 अक्टूबर 2021 को दोपहर में राज भारती के निर्देशन में प्रस्तुति दी गई। जिसमें कलाकारों ने स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अन्य कई संदेशों पर आधारित थी। यह प्रस्तुति 45 मिनट की दी गई। राज भारती, मुकेश भारती, मदन भट्ट ढोलक पर, बद्री भट्ट ने सहयोग किया। प्रस्तुति धागा शैली पर आधारित रही। वहीं सायं के समय धागा, कंटम्प्रेरी और मपेट शैली में मुंबई के कपिल देव एवं साथियों द्वारा कठपुतली नाट्य में एक बदमाश भेडिये की कथा को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति के दौरान शेडो, धागा, मपेट, रॉड, हाल्फ मास्क का इस्तेमाल किया है। यह कथा एक बदमाश भेडिया की है जिसे बचपन में सभी ने पढ़ी एवं सुनी होगी।यह कथा अंग्रेजी में पढ़ने और सुनने को मिलती है। प्रस्तुति की शुरूआत गाने से होती है। प्रस्तुति में तीन छोटे सुअर होते हैं जिसमें मूर्खानंद, दीवाना और होशियारचंद। जिन्हे भेड़िया तंग करता है और इनके साथ मुख्य किरदार में गुड़ियारानी है। एक दिन गुड़ियारानी अपनी नानी के घर जाती है और उसे लोग काफी डरा देते हैं कि जंगल के रास्ते में एक बदमाश भेड़िया है। यह बात जब गुड़िया रानी के पिता को पता चलती है तो वे गुड़िया से कहते हैं कि यह सब अफवाह है। जंगल में कोई भेड़िया नहीं है। अगले दृश्य में भेड़िया भी नानी के घर पहुंच जाता है और बदमाशी से नानी के साथ सभी को अलमारी में बंद कर देता है। बदमाश भेड़िया नानी के वेष में गुड़िया रानी का इंतजार करता है और जब गुड़िया रानी नानी के यहां पहुंचती है तो नानी को देखकर वह कहती है कि नानी आपने अपनी कैसी हालत बना ली है। कुछ देर तक तो बहरूपिया भेड़िया बात बनाता है लेकिन गुड़िया रानी उसे पहचान लेती है और गुड़िया रानी भेड़िये से कहती है कि वह उसका कुछ नहीं हिगाड़ सकता है और उसे पकड़कर दिखाये। रानी भेड़िये को भगाते भगाते थका देती है और अंत में नानी एवं गुड़िया रानी भेड़िये को सबक सिखाती हैं। यह प्रस्तुति हिम्मत होशियारी से काम लेने की सीख देती है। दूसरी प्रस्तुति साथी की दी गई जिसमें जानवर और इंसान की मित्रता की कहानी को मंचित किया गया। ये दोनों ही प्रस्तुति ड़ेढ घंटे की रही।
Leave a Reply