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पीएससी पाठ्यक्रम में सिविल अधिकार संरक्षण और अजा-जजा अत्याचार निवारण अधिनियम शामिल किए जाएंः दिग्विजय
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) के पाठ्यक्रम में मध्यप्रदेश सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कानूनों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से पीएससी में चयनित अधिकारियों को सरकारी सेवा के दौरान इनके जानकारी होने से कानूनों का पूर्ण पालन कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा परीक्षा 2021 के लिये 28 दिसंबर 2020 को जारी विज्ञापन की ओर ध्यानाकर्षित कराया है। आयोग के विज्ञापन में प्रारंभिक परीक्षा के लिये पाठ्यक्रम भी घोषित किया गया है। सिंह ने लिखा है कि विगत वर्ष 2019 में आयोजित राज्य सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम में मध्यप्रदेश सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था। इसके पीछे यह मंशा बताई कि राज्य की सिविल सेवा में चयनित होकर आने वाले अधिकारियों को इन दोनों प्रमुख कानून का विस्तृत ज्ञान हो। ये दोनों कानून लोक प्रशासन में संवैधानिक संरक्षण के प्रतीक है।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में दुख व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2021 में आयोजित की जा रही सिविल सेवा परीक्षा के सिलेबस में से यह दोनों कानून हटा दिए हैं। इन कानूनों को पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर दिग्विजय सिंह ने राज्य शासन और आयोग से पुनः विचार करने की मांग कीहै। क्योंकि ये कानून वंचित वर्ग के मानव अधिकारों और दलित समाज को अत्याचारों से निजात दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सिंह ने लिखा है कि मध्यप्रदेश देश उन राज्यों में से एक है, जहाँ अनुसूचित जाति की 15.60 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की 21.06 प्रतिशत आबादी निवासरत है। जिसकी प्रदेश में कुल आबादी तीन करोड़ से अधिक है।
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