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पीएफआई पर बैन, आतंक फैलाने- एकता को खतरा पैदा करने की गतिविधियां संचालित करने का आरोप
पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उससे जुड़े आठ अन्य संगठनों को भारत सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है। इन पर पांच साल के पाबंदी लगाई गई है। इन संगठनों के पदाधिकारियों और सक्रिय सदस्यों पर विश्वभर में आतंकी घटनाओं में शामिल आतंकी संगठनों से संबंध होने का आरोप है। पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस), स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ (इंडिया (सिमी), जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) जैसे संगठनों से संबंध भी रहे हैं जिन्होंने सीरिया, अफगानिस्तान और इराक में आतंकी गतिविधियों में भाग भी लिया।
भारत सरकार की अधिसूचना में पीएफआई सहित रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल जैसे सहयोगी संगठनों पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
पीएफआई कैडर के आतंकियों पर इनकी हत्या के आरोप
केरल में बिबिन (2017), अभिमन्यू (2018), संजीत (नवंबर 2021), नंदू (2021), तमिलनाडू में वी रामलिंगम (2019), शशिकुमार (2016), कर्नाटक में आर रुद्रेश व प्रवीण पुजारी (2016), शरत (2017) और प्रवीण नेतारू (2022)।
यूपी-कर्नाटक और गुजरात ने की सिफारिश
भारत सरकार से पीएफआई पर प्रतिबंध की उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की राज्य सरकारों ने सिफारिश की थी। भारत सरकार ने पीएफआई की गतिविधियों को देखते हुए उस पर और उससे जुड़े संगठनों पर तत्काल रोक लगाने के लिए प्रतिबंध का फैसला किया और मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई।




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