मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय की ओर से रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर 10 से 14 अक्टूबर 2021 तक श्री रामलीला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पांच दिवसीय रामलीला उत्सव में लीला मण्डल-रंगरेज कला संस्कार उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सायं 6.30 बजे से रामकथा के विभिन्न प्रसंगो की प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। जिसमें तीसरे दिन 12 अक्टूबर को सुग्रीव मैत्री, बालि वध, सेतु बंध, रावण-अंगद संवाद, लंका दहन, कुंभकरण-मेघनाथ वध, रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग मंचित गए। जिसका प्रसारण विभाग के यूट्यूब चैनल https://youtu.be/HZA-oT9tf1E और फेसबुक पेज https://www.facebook.com/events/260186222559787/?sfnsn=wiwspwa पर लाइव प्रसारित किया गया।
उत्सव के अवसर पर वनवासी लीला नाट्य आलेख की कथा आधारित 50 चित्रों की प्रदर्शनी भी 10 से 14 अक्टूबर तक संयोजित है, जिसमें लीला नाट्य भक्तिमति शबरी को आंध्रप्रदेश की चेरियालपटम् शैली में तथा निषादराज गुह्य को राजस्थान की नाथद्वारा शैली में प्रस्तुत किया गया है।
श्री रामलीला उत्सव की शुरूआत श्रीराम आरती से होती है। इसके बाद राम और हनुमान का पहली बार मिलना, हनुमान द्वारा राम और सुग्रीव की मैत्री कराना तथा सुग्रीव द्वारा यह बताया जाना कि उसका राज्य बड़े भाई बालि ने षड्यंत्रपूर्वक हासिल किया है और उसको मुसीबतों में छोड़ दिया है, इस पर रामचंद्र जी का सुग्रीव की सहायता और बालि का वध अहम प्रसंग मंचित होता है। राम, सीता की खोज में शीघ्रता करते हैं और सेतु बंध प्रसंग में भगवान राम सेना सहित लंका पहुंचने के लिए समुद्र से विनयपूर्वक रास्ता मांगते हैं। नल और नील को मिले श्राप से पत्थर पानी में नहीं डूबते एवं सेतुबंध से सेना लंका पहुंचती है। लंका पहुंचने के बाद जामवंत की सलाह पर रावण को समझाने अंगद को भेजा जाता है। कथा के अगले दृश्य में रावण-अंगद संवाद, कुंभकरण-मेघनाथ वध, रावण वध, लंका दहन एवं श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग मंच पर मंचित किए गए। कथा में भाव संप्रेषण, पात्रों का कुशल अभिनय, रूपांकन, संगीत, मंच सज्जा ,वेशभूषा, अस्त्र शस्त्र आदि का प्रयोग किया गया।
आज हुए प्रसंगों में राम का किरदार सुमित नागर (देवर्श नागर) ने, लक्ष्मण का अमित शर्मा ने, रावण का कैलाश चौहान ने, सीता का किरदार निकिता पोरवाल, हनुमान का गौरव पवार ने, अंगद के किरदार में प्रज्जवलित चौहान दिखाई दिये।
उत्सव के चौथे दिन संस्कृति विभाग द्वारा आरण्यक निवासियों और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के प्रति भक्ति भावना के सम्बन्ध को लोकव्याप्ति प्रदान करने के उद्देश्य वनवासी लीलाएँ तैयार कराई गयीं। इन लीलाओं की विशिष्टता यह है कि इनके अभिनय से सम्बद्ध कलाकार प्रदेश के अलग-अलग जनजातीय समुदाय से हैं। जिसमें 13 अक्टूबर को गुरू प्रसन्नदास, सतना के निर्देशन में वनवासी लीला-निषादराज गुह्य की प्रस्तुति दी जाएगी। इन लीलाओं का आलेख श्री योगेश त्रिपाठी द्वारा लिखा गया है।
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