-
दुनिया
-
US-INDIA ट्रेड डील के खिलाफ MODI पर जमकर बरसे RAHUL, बताया EPSTEIN फाइलों की धमकियों का दबाव
-
अकेले रहने वाले बुजुर्गों को टारगेट कर रहे Cyber ठग, Gwalior में 90 साल Couple शिकार
-
Indian क्रिकेट के सूरमाओं का सरेंडर, Super 8 के पहले मैच में करारी हार
-
अमेरिकी TRADE DEAL के खिलाफ INC आंदोलन की तैयारी, RAHUL GANDHI व खड़गे की उपस्थिति में BHOPAL में पहला किसान सम्मेलन
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
पर्वतारोही मेघा परमार भी हरे-भरे लाखों पेड़ों को काटे जाने से आहत
बकस्वाहा के जंगलों में हीरा खनन के लिए बिड़ला समूह को लीज दिए जाने के प्रोजेक्ट का विरोध धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। एनजीओ के समूह विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून को बकस्वाहा पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कुछ प्रमुख हस्तियों द्वारा भी जंगल को काटे जाने के प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताई जाने लगी है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे सीहोर जिले की पर्वतारोही मेघा परमार भी हरे-भरे लाखों पेड़ों को काटे जाने से आहत हैं।
वे कहती हैं कि उन्हें पता है कि एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ते समय उन्हें ऑक्सीजन की कितनी जरूरत महसूस हुई थी और तब उसकी अहमियत समझ आई थी। तभी यह निश्चय कर लिया था कि नीचे पहुंचकर पेड़ लगाएंगी जिससे ऑक्सीजन ज्यादा से ज्यादा वातावरण में मिल सके। जनजीवन के लिए प्राणवायु बेहद जरूरी है और इसके लिए जंगल को सुरक्षित रखे जाने की आवश्यकता है। लाखों पेड़ों को काटना उचित नहीं है। अगर हमारी खबरों को देखने के लिए कृपया हमारे यूट्यब न्यूज चैनल को लॉगिन करें, शेयर करें, लाइक करें और सब्सक्राइव भी करें।




Leave a Reply