-
दुनिया
-
US-INDIA ट्रेड डील के खिलाफ MODI पर जमकर बरसे RAHUL, बताया EPSTEIN फाइलों की धमकियों का दबाव
-
अकेले रहने वाले बुजुर्गों को टारगेट कर रहे Cyber ठग, Gwalior में 90 साल Couple शिकार
-
Indian क्रिकेट के सूरमाओं का सरेंडर, Super 8 के पहले मैच में करारी हार
-
अमेरिकी TRADE DEAL के खिलाफ INC आंदोलन की तैयारी, RAHUL GANDHI व खड़गे की उपस्थिति में BHOPAL में पहला किसान सम्मेलन
-
फिर Political माहौल की गर्मा गरमी के बीच बेतुका फैसला, MP कांग्रेस के प्रवक्ताओं की छुट्टी
-
पर्यावरण व मानव जीवन के लिए घातक है जीएम बीज: दिनेश कुलकर्णी
जीएम सरसो को लेकर भारतीय किसान संघ ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज भारतीय किसान संघ के प्रदेश कार्यालय भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने जी.एम. सरसो को पर्यावरण और मानव जीवन के लिए घातक बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि जीएम सरसो को लेकर जी.ई.ए.सी.ने भी जल्दबाजी में निर्णय लिया है। उन्होंने अवैज्ञानिक और अपारदर्शी तरीके से इसकी जांच की है,जिसका भारतीय किसान संघ विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ टैक्नोलॉजी के विरोध में नहीं है,लेकिन जीएम सरसो खाद्य तेल होने के कारण फसल मानकर परीक्षण करना उचित नहीं है। जी.ई.ए.सी. को मनुष्य के स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशुओं के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले प्रभावों को भी बारीकी से परीक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन देशों में जीएम सरसो का उत्पादन होता है,वहां वे पशु चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सरकार में बैठे जो लोग जीएम सरसो का समर्थन कर रहे हैं ,वो उत्पादकता बढऩे का दावा कर रहे हैं,इसके परीक्षण में ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है। श्री कुलकर्णी ने कहा कि जीएम सरसो एक तरह का अपरिवर्तनीय तकनीक है,जो कि जैव विविधता के लिए भी हानिकारक है। साथ ही उन्होंने कहा कि जीएम सरसो खरपतवार नाशक रोधी ‘हरबीसाइड टॉलरेंट’ करके ही विकसित किया गया है। इसमें ग्लायफोसाइनेट दवाई का छिड़काव किया जाता है,जिससे सरसो का पौध छोड़कर अन्य सभी पौधे नष्ट हो जाते हैं। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव मधुमक्खी पर होगा,जो कि पर्यावरण के साथ मानव जीवन के लिए भी खतरा है। जबकि हमारे भातरीय कृषि वैज्ञानिकों ने परंपरागत तरीकों से देसी सरसो के बीज तैयार किए हैं जो अधिक उत्पादकता देने में सक्षम हैं।
उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार के मांग करते हुए कहा कि इस तकनीक का किसानों पर,समाज पर,आर्थिक रूप से क्या प्रभाव होगा इसका भी विश्लेषण करना चाहिए। जीएम सरसो के विरोध में भारतीय किसान संघ हर स्तर पर इसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान,गुजरात,महाराष्ट्र,कर्नाटक,हरियाणा,पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों ने भातरीय किसान संघ की मांग को माना है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार भी अन्य राज्यों की तरह जीएम सरसो को अनुमति नहीं देने की मांग की है।




Leave a Reply