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पन्ना में दूषित पानी पीने से तीन बच्चों की मौत, मप्र मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञा
पन्ना जिले के समीपी ग्राम पुरूषोत्तमपुर के 70 परिवारों की आदिवासी बस्ती चांदमारी के बच्चे कुपोषण का शिकार हंै। एक सप्ताह में यहां तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 बीमार हंै। बीमारों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले का खुलासा महिला बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंचने के बाद हुआ है। इस गंभीर मामले में त्वरित संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, सचिव, स्वास्थ्य विभाग सहित पन्ना जिले के कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि दो बच्चों विनीता पिता अजय आदिवासी एवं शिवा पिता बाबूलाल आदिवासी की 27 जून को मौत हो गई। रश्मि पिता छोटे ने 2 जुलाई को दम तोड़ दिया। ये तीनों ही बच्चे कुपोषण का शिकार बताये गये हैं। बीते मंगलवार को डाॅक्टरों और अधिकारियों की टीम गांव पहुंची। बीमार बच्चों को जिला अस्पताल लाया गया। गांव में शमशान के पास पीने के पानी के लिये केवल एक कुआं है। कुओं के पास ही एक छोटी सी तलैया है, इसी में पशु भी पानी पीते है। जिन तीन बच्चों की मौत हुई है, उनमें 4 वर्ष का शिवा कुपोषण केे कारण एनआरसी में भर्ती रह चुका है। ऐसे कई बच्चे हैं, जिन्हें जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा। जिला कार्यक्रम अधिकारी पन्ना ने बताया कि 7-8 बच्चों की आंखं आड़ी-तिरछी हैं। यह कुपोषण के लक्षण हैं। यहां के बच्चे पोषण की कमी और दूषित पानी के कारण संक्रमित हो रहे हैं। सीएमएचओ पन्ना का कहना है कि दूषित पानी के कारण यह बीमारी हो सकती है। सभी बच्चों का उपचार किया जा रहा है।




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