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नागरिकता संशोधन बिल पर संघीय व्यवस्था की परम्परा का पालन नहीं किया
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि नागरिकता संशोधन बिल पर केन्द्र सरकार ने संघीय व्यवस्थाओं की परम्परा का पालन न करते हुए बहुमत के बल पर संशोधन बिल पास करवाया है। उससे देश की एकता और अखण्डता को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि बहुमत से लोकसभा चलाई जा सकती है लेकिन देश नहीं। श्री नाथ शीतकालीन सत्र शुरू होने के पूर्व अपने निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सर्वसहमति और आपसी चर्चा जरूरी होती है। नागरिकता संशोधन बिल पर केन्द्र सरकार को देश के सभी मुख्यमंत्रियों से बैठक कर चर्चा करनी चाहिए। हमारी देश की संस्कृति और विविधता को अक्षुण रखने और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी का सहयोग लिया जाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा केन्द्र सरकार ऐसा नहीं कर रही है इससे देश का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 1 साल के कार्यकाल पूरा होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान उनके सामने बड़ी चुनौतियाँ थी। खाली खजाना था, भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में 800 करोड़ की ऐसी योजनाएँ लागू की थी जिनका बजट में कोई प्रावधान नहीं था। उनका भुगतान भी हमें करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दौरान केन्द्र से जीएसटी का जो प्रदेश का हिस्सा मिलना था वह भी नहीं मिल रहा है। यूपीए सरकार के समय केन्द्रीय योजनाओं में 90 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र का और 10 प्रतिशत राज्य का हिस्सा होता था। वर्तमान में केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने इसे घटाकर 60 और 40 प्रतिशत कर दिया है। इन विपरित परिस्थितियों में हमनें वचन पत्र के आधार पर प्राथमिकताएँ तय की और ऋण माफी जैसे बड़े फैसले लिए और काम किया।
मुख्यमंत्री ने विधायकों से कहा कि वे शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के गुमराह करने और झूठे आरोपों का पूरी ताकत से जवाब दें। उन्होंने सभी मंत्रियों से कहा कि वे पिछले एक साल के काम काज की जानकारी विधायकों को दें ताकि वे वस्तु स्थिति सदन में रख सकें।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने झाबुआ के नव निर्वाचित विधायक श्री कांतिलाल भूरिया का स्वागत किया। सामान्य प्रशासन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने सभी मंत्रियों और विधायकों का स्वागत किया।




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