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थेटे ने सीएम को खत लिखा, लोकायुक्त को जातिवादी ठहराया, अभियोजन स्वीकृति पर पुनर्विचार की मांग
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रमेश थेटे के खिलाफ राज्य शासन द्वारा उज्जैन के सीलिंग के मामले में दी गई अभियोजन स्वीकृति के बाद थेटे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। इसमें लोकायुक्त पीपी नावलेकर पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक जैसे आदेश के बाद भी केवल उन पर ही केस चलाने से यह स्पष्ट है कि ब्राह्मण और सवर्णों अफसरों ने शासन को गुमराह कर उन्हें फंसाया है।
आईएएस अधिकारी रमेश थेटे ने सीएम को तीन पेज का पत्र लिखा है। इस पत्र में अभियोजन स्वीकृति पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि उज्जैन संभाग में सीलिंग से जमीन को मुक्त करने के आदेश केवल उन्होंने ही नहीं दिए थे बल्कि एसके वशिष्ठ, स्वर्णमाला रावला, जयदीप गोविंद ने भी किए थे। मगर इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर मेरा आदेश गलत है तो फिर मेरे पहले के सभी अधिकारियों के आदेश गलत हैं व उनके खिलाफ भी वही कार्रवाई होना चाहिए। थेटे ने सीएम को कहा कि तथ्यों को छिपाकर उन्हें गुमराह किया गया है। अत: मेरे खिलाफ दी गई अभियोजन स्वीकृति पर पुनर्विचार किया जाए, अन्यथा मैं अन्न् जल त्याग दूंगा।




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