डोकलाम से दोनों देश आर्मी हटाएंगे: भारत

भारत और चीन डोकलाम से अपने-अपने जवानों को पीछे हटाने पर राजी हो गए हैं। विदेश मंत्रालय के सोमवार को सामने आए बयान से यही संकेत मिले। बयान के मुताबिक, हाल ही के हफ्तों में भारत-चीन ने डोकलाम मुद्दे पर डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन बनाए रखा। इस दौरान दोनों देशों ने एकदूसरे की चिंताओं और आपसी हितों की बात की। इसी बुनियाद पर डोकलाम से जवानों का ‘डिसइंगेजमेंट’ करने पर रजामंदी बनी। यह प्रॉसेस जारी है। दोनों देशों के बीच डोकलाम में जून से विवाद था। माना जा रहा है कि इस बयान से अब 72 दिन बाद डोकलाम मसला हल हो चुका है। यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त हुआ है जब चीन में 3 से 5 सितंबर के बीच ब्रिक्स समिट होनी है। इसमें नरेंद्र मोदी हिस्सा ले सकते हैं। अगर मोदी चीन जाते हैं तो उनकी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात होगी। इस बीच, चीन ने बयान जारी कर दावा किया कि डोकलाम से सिर्फ भारतीय जवान पीछे हटे हैं। हालांकि, उसकी फॉरेन मिनिस्ट्री ने साफ तौर पर ये भी कहा कि वो इस मामले में ‘एडजस्टमेंट्स’ करेंगे। ये फैसला क्यों अहम…
– मोदी को अगले हफ्ते ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग (3 से 5 सितंबर) जाना है। अगर वो इस विवाद की वजह से वहां नहीं जाते तो ये चीन को ग्लोबल लेवल पर बड़ा नुकसान माना जाता। ये इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने कुछ महीने पहले वन बेल्ट-वन रोड समिट में हिस्सा नहीं लिया था।
– भारत ने यहां 350 जवान तैनात किए थे। डोकलाम विवाद 16 जून को शुरू हुआ था। चीन डोकलाम में सड़क बनाना चाहता था। भारत और भूटान ने इसका विरोध किया था। चूंकि, यहां तीन देशों की सीमाएं मिलती हैं, इसलिए इसे ‘ट्राइजंक्शन’ एरिया कहा जाता है।
इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री ने क्या कहा?
– इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा- विवाद शुरू होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच ‘डिप्लोमैटिक कम्युनिकेशन’ जारी था। दोनों ने अपनी-अपनी चिंताएं बताईं। हितों पर भी बात हुई।
– हालांकि, इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री के बयान में साफ तौर पर ये नहीं कहा गया है कि दोनों देशों की सेनाएं डोकलाम से हटाई जाएंगी। इंडियन फॉरेन मिनिस्ट्री से जब ये पूछा गया कि चीन ने कोई ‘राहत’ देने से इनकार किया है। इस पर विदेश मंत्रालय के एक अफसर ने न्यूज एजेंसी से कहा- समझौते का मतलब ही यही है कि दोनों देश सेनाएं हटाएंगे। अगर भारत को ही सेना हटानी होती तो फिर समझौता कैसे होता?
चीन ने क्या कहा?
– चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा- चीन अपनी सॉवरनिटी की सिक्युरिटी करता रहेगा। हम हालात के हिसाब से ‘एडजस्टमेंट्स’ करेंगे। चीन ने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि वो अपनी सेना हटाएगा।
– चीन की स्पोक्सपर्सन ने कहा- पुराने समझौते के आधार पर ही हालात जारी रहेंगे। भारतीय सैनिक अपने इक्युपमेंट्स भी वापस ले जाएंगे।
यह चीन से ज्यादा भारत की कामयाबी क्यों है?
1) चीन ने थोपी थी शर्त
– चीन ने अगस्त की शुरुआत में डोकलाम विवाद पर 15 पेज और 2500 शब्दों का बयान जारी किया था। उसने आरोप लगाया था कि जून में भारत के 400 जवान उसके इलाके में रोड कंस्ट्रक्शन रोकने के लिए घुस आए थे। भारतीय जवानों ने वहां तंबू गाड़ दिए थे। चीन का दावा था कि अभी भारत के 40 सैनिक और एक बुलडोजर उसके इलाके में मौजूद हैं।
– चीन ने भारत से कहा था कि भूटान तो बहाना है। उसके बहाने भारत दखल दे रहा है। उसे तुरंत और बिना शर्त वहां से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए।
2) भारत के मुताबिक अब चीन को भी हटाने होंगे जवान
– चीन भारत से ही कहता रहा कि वह अपने सैनिक हटाए, लेकिन विदेश मंत्रालय का सोमवार को आया बयान यह इशारा करता है कि चीन भी अपने जवानों का डोकलाम से ‘डिसइंगेजमेंट’ करेगा। यानी सिर्फ भारत पर पीछे हटने की शर्त थोप रहे चीन को भी अपने जवान पीछे हटाने के लिए राजी होना पड़ा है।
3) अलग संकेत दे रहा है चीन
– विदेश मंत्रालय का बयान अाने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने बीजिंग में स्टेटमेंट जारी किया। भारत के दावे से अलग चीन ने कहा कि भारत के जवान डोकलाम से पीछे हटे हैं। लेकिन चीन के सैनिक उस इलाके में बने रहेंगे और अपनी संप्रभुता (सॉवरनिटी) कायम रखेंगे।
– न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, चीन ने कहा है कि वह डोकलाम के इलाके में पैट्रोलिंग जारी रखेगा।
मौजूदा विवाद क्या था?
– चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा था। यह घटना जून में सामने आई थी। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं। भारत भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलाेंग कहलाता है।
– चीन ने 16 जून से यह सड़क बनाना शुरू की थी। भारत ने विरोध जताया तो चीन ने घुसपैठ कर दी थी। चीन ने भारत के दो बंकर तोड़ दिए थे।
– दरअसल, सिक्किम का मई 1975 में भारत में विलय हुआ था। चीन पहले तो सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता था। लेकिन 2003 में उसने सिक्किम को भारत के राज्य का दर्जा दे दिया। हालांकि, सिक्किम के कई इलाकों को वह अपना बताता रहा है।
72 दिन में टकराव कितना बढ़ा?
– चीन ने अपने विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया के जरिए भारत को कई धमकियां दीं। हालांकि, भारत की तरफ से संयमित बयान दिए गए। सुषमा स्वराज ने संसद में कहा कि बातचीत से ही इस मसले का हल निकलेगा।
– इसी बीच, 15 अगस्त को चीन के कुछ सैनिकों ने लद्दाख की पेंगगोंग लेक के करीब भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को रोकने की कोशिश की। इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच पहले हाथापाई हुई। इसके बाद मामला पत्थरबाजी तक पहुंच गया।
– इसके बाद माना गया कि दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ेगा लेकिन डिप्लोमैटिक चैनल्स के जरिए डोकलाम विवाद 72 दिन बाद सुलझता दिखा।
किस समझौते की वजह से होता रहता है विवाद?
– विवाद की वजह 1890 का वह समझौता है, जो ब्रिटिश शासन ने चीन के चिंग राजवंश के साथ किया था। उसमें अलग-अलग जगहों पर बॉर्डर दिखाई गई थीं। उसके मुताबिक, एक बड़े हिस्से पर भूटान का कंट्रोल है, जहां भारत का उसे सपोर्ट और मिलिट्री कोऑपरेशन हासिल है।
– इसी समझौते के हिस्से में आने वाले डोकलाम के पठार पर भारत और चीन के जवान शून्य डिग्री से नीचे के तापमान में तैनात हैं। ये तैनाती नॉर्मल नहीं है।
इस बार चीन को रोकना क्यों जरूरी था?
– चीन जहां सड़क बना रहा है, उसी इलाके में 20 किमी हिस्सा सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह ‘चिकेन नेक’ भी कहलाता है। चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा तो भारत की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे। अगर चीन ने सड़क को बढ़ाया तो वह न सिर्फ भूटान के इलाके में घुस जाएगा, बल्कि वह भारत के सिलीगुड़ी काॅरिडोर के सामने भी खतरा पैदा कर देगा। दरअसल, 200 किमी लंबा और 60 किमी चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी राज्यों से जोड़ता है। इसलिए भारत नहीं चाहेगा कि यह चीन की जद में आए।
क्या भारत ने बढ़ा दी थी तैनाती?
– भारत ने चीन से सटे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के 1400 किलोमीटर लंबे सिनो-इंडिया बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी थी। सरकार के मुताबिक, देश की पूर्वी सरहद पर फौज के लिए अलर्ट लेवल बढ़ा दिया गया था।
– डोकलाम में पहले से ही 350 आर्मी पर्सनल तैनात थे।
डोकलाम पर भूटान का क्या स्टैंड रहता है?
– भूटान के मुताबिक डोकलाम में उसका इलाका भी आता है। चीन उसके इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहा था। भूटान की गुजारिश पर ही भारतीय जवान वहां पहुंचे तो चीनी सैनिकों को रोका था।

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