जीवन नहीं जीवनी हो सकती है अमर-प्रह्लाद पटेल

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी पंडित श्रीनिवास शुक्ल को गुरुवार को उनके जन्म शताब्दी  समारोह में उनके व्यक्तिव और कृतित्व को शिद्दत से याद किया गया। आडिटोरियम में आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने मुख्य अतिथि के तौर पर कहा कि जीवन नहीं जीवनी अमर हो सकती है। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अशोक सोहनी थे।

बुंदेलखंड केशरी महाराजा छत्रसाल स्मारक पब्लिक ट्रस्ट द्वारा आयोजित समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि उन्हें श्रीनिवास जी के दर्शन, चर्चा का सौभाग्य मिला है। ऐसे लोग ईश्वरीय कृपा से धरती पर आते हैं। वातावरण में जिस तरह के लोग होते हैं उसी तरह का माहौल बनता है। ऐसी ऊर्जा हमारे बीच होने से हमारी सोच बदलती है। इतने आयाम जिसके जीवन मे हों हमे उससे संकल्प अवश्य लेना चाहिए।मुख्य वक्ता अशोक सोहनी ने कहा कि श्रीनिवास शुक्ल ने लेखन के क्षेत्र  में बड़ा काम किया है और मौलिक चीजें लिखीं हैं। ये सामान्य व्यक्ति के वश की बात नहीं है। व्यक्ति साधना तक जब पहुंचता है तब चिंतन निकलता है जो समाज का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल भाषा नहीं जीवन का संस्कार है। लेकिन आज हम भाषा से दूर होते जा रहे हैं।पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि पंडित जी बहुत सी विधाओं में पारंगत थे। जीवन और समाज का ऐसा कोई क्षेत्र बाकी नहीं जहां उन्होंने उत्कृष्ट काम न किया हो। श्री चतुर्वेदी ने श्रीनिवासजी से जुड़े तीन संस्मरण सुनाते हुए उनके उदार हृदय से परिचित कराया। वे संघ के पदाधिकारी होते हुए भी कांग्रेस के कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था संभालने वाले विरले व्यक्ति थे। इतना ही नहीं ईदगाह निर्माण में बिना बुलाए ही सहयोग के लिए आगे आना उनके खुले मन का परिचायक है।साहित्यकार डॉ बहादुर सिंह ने कहा कि याद उसी को किया जाता है जो अपना सर्वस्व लुटाकर समाज को प्रेरणा देते हैं। उनकी काव्य रचनाओं का उल्लेख करते हुए डॉ परमार ने कहा कि वे कवि भर नहीं अनुवादक थे। उनके जीवन से पता चलता है कि दूसरों के लिए जीने का आनंद क्या होता है। वरिष्ठ साहित्य कार  सुरेन्द्र शर्मा शिरीष ने श्री शुक्ल के जीवन पर चर्चा करते हुई कहा कि वे सभी वर्ग को लेकर चलते थे। वे अपनी बात बड़ी निर्भीकता और शालीनता से कहते थे। उनका काव्य संग्रह अनूठा है। वे अपने सिद्धांत के अडिग थे। उन्होंने सम्पूर्ण जीवन आदर्श के लिए जीया भारतीय धरोहर नई दिल्ली के निदेशक डॉ कृपाशंकर तिवारी ने कहा कि ये पुनरावलोकन का मौका है। श्रीनिवासजी बहुत बड़े राष्ट्रवादी थे। राष्ट्रवाद उनकी शक्ति थी। वे राम के कल्याण और कृष्ण की सूझबूझ का समागम थे।  वरिष्ठ अधिवक्ता नारायण काले ,मंचासीन अतिथि  नमामि गंगे के राष्ट्रीय संयोजक डॉ भरत पाठक, गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ राकेश मिश्र, लेखक अश्वनी बाजपेई, पत्रकार रविंद्र अरजरिया, विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह,महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो टीआर थापक ने भी श्री शुक्ल जी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज को दिशा देने में जो योगदान दिया। उसे भुला पाना आसान नहीं। उन्हें माँ सरस्वती का वरदान मिला था।  ट्रस्ट के सचिव सुरेंद्र शर्मा “शिरीष” ने श्रीनिवास शुक्ल के व्यक्तित्व, कृतित्व पर प्रकाश डाला। समारोह में श्रीनिवास शुक्ल की कृति नींव शिला के द्वितीय संस्करण का विमोचन भी किया गया। समारोह में मुख्य आयोजक छत्रसाल स्मारक ट्रस्ट के संयोजक योगेंद्र प्रताप सिंह ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया। आभार छत्रसाल स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष हरी प्रकाश खरे ने व्यक्त किया। समारोह का संचालन आकाशवाणी के सेवानिवृत अधिकारी सुरेंद्र तिवारी ने किया। इस गरिमामयी समारोह का शुभारंभ कंठ कोकिला उर्मिला पांडेय द्वारा बुंदेली गीत मैया पैंया लगो से हुआ। इस मौके पर भाजपा के जबलपुर के संभागीय संगठन मंत्री शैलेन्द्र बरुआ, विधायक प्रद्युम्न सिंह, राजेश प्रजापति, पूर्व विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक, बिजय बहादुर सिंह, पूर्व अध्यक्ष नपा अर्चना सिंह, भाजप जिला अध्यक्ष मलखान सिंह, महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ नंदिता पाठक, कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह, एसपी सचिन शर्मा सहित तमाम प्रबुद्ध जन मौजूद रहे। 

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