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चुनावी जमावटः नए चीफ सेक्रेटरी का इंतजार नहीं, चुनाव के सालभर पहले प्रशासनिक जमावट
मध्य प्रदेश में इन दिनों प्रशासनिक जमावट चुनावी लिहाज से शुरू हो गई है क्योंकि ठीक 11 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उन चुनावों के पहले सरकार अपने ढंग से प्रशासनिक जमावट करके अधिकारियों को पदस्थ करने में जुटी है। इस महीने प्रशासन के मुखिया का बदला जाना है लेकिन इसके बाद भी सरकार अपने स्तर पर मंत्रालय-विभागाध्यक्ष और जिलों में परिवर्तन करने में जुटी है। उसने आने वाले चीफ सेक्रेटरी का इंतजार किए बिना ही दो दिनों के भीतर 41 आईएएस-38 डिप्टी कलेक्टरों की बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर दी है।
मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी इकबाल सिंह बैस इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं जिनकी जगह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अनुराग जैन के मुख्य सचिव बनने की चर्चा जोरों पर है। बैस के रिटायरमेंट के 20-22 दिन पहले भी सरकार प्रशासनिक सर्जरी करने के बड़े फैसले लेने से नहीं चूकी है जबकि प्रशासनिक सर्जरी में मुख्य सचिव की भूमिका भी अहम होती है। नए चीफ सेक्रेटरी का इंतजार भी राज्य सरकार ने नहीं किया और पिछले तीन दिनों के भीतर 41 आईएएस अधिकारियों और 38 राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों सहित ढेरों तहसीलदारों- ग्रामीण क्षेत्रों के इंजीनियरों को यहां से वहां कर दिया है।
इंदौर-जबलपुर-नरसिंहपुर जैसे जिलों में नए कलेक्टर
राज्य सरकार ने प्रशासनिक सर्जरी में राजधानी भोपाल-नर्मदापुरम संभागों के कमिश्नर बदलने से परहेज नहीं किया तो इंदौर, जबलपुर, नरसिंहपुर, मुरैना, छिदंवाड़ा, उमरिया, सीधी, देवास, धार, सीहोर, बुरहानपुर, सिंगरौली, आगर मालवा और कटनी जैसे जिलों के कलेक्टरों को भी हटाने में देरी नहीं की है। यही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़े कामों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिस पंचायत-ग्रामीण विकास विभाग की है, वहां के मुखिया को भी हटा दिया है। इसकी मुख्य वजह मंत्री और विभाग के मुखिया के बीच पटरी नहीं बैठना बताया जा रहा है। कुछ विभागों के अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है जिसमें सरकार की सड़कों की खराब स्थिति पर लोगों की काफी नाराजगी देखी जा रही थी।




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