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चीता को लाकर कूनो में छोड़ने के पहले कैसे हुआ स्थल चयन, जानिये

नामीबिया से भारत लाए जाने वाले चीतों को किस अभ्यारण्य में छोड़ा जाए, यह बहुत मुश्किल सवाल था। इसके लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान को जिम्मेदारी दी गई और तमाम जगह टीमों ने पहुंचकर अध्ययन किया। दस स्थानों के सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क का चयन हुआ जिसे चीता के रहवास के लिए उपयुक्त माना गया।
पर्यावरण और वन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के निर्देश पर वर्ष 2010 में भारतीय वन्य जीव संस्थान (वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट) ने भारत में चीता पुनर्स्थापना के लिए संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जिसमें 10 स्थलों के सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर अभ्यारण्य जो वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान है, सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। कूनो के राष्ट्रीय उद्यान के 750 वर्ग किलोमीटर में लगभग दो दर्जन चीतों के रहवास के लिए उपयुक्तता है। इसके अतिरिक्त करीब 3 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र दो जिलों श्योपुर और शिवपुरी में चीतों के स्वंच्छद वितरण के लिए उपयुक्त हैं।
कूनो नदी किनारे स्थित है पार्क
प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर कूनो नेशनल पार्क के आगोश में बहने वाली कूनो नदी इसे न केवल ओर भी अधिक खूबसूरत बना देती है बल्कि इसके सपाट और चौडे़ तटों पर खिली हुई धूप में अठखेलियां करते मगरमच्छ यहां आने वाले लोगों को रोमांचित कर देते है। कूनो नेशनल पार्क में विभिन्न प्रकार के 174 पक्षियों की प्रजातियां मौजूद है, वही सैकडो प्रजातियां वन्य जीवों की है। पक्षियों की 12 प्रजाति तो दुलर्भ श्रेणी में मानी गई हैं।
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