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‘गमक’ अन्तर्गत नाटक ‘भिखारीनामा’ का मंचन
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गमक श्रृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुतियों के अंतर्गत रवींद्र भवन में भिखारी ठाकुर रंगमन्डल, छपरा (बिहार) के कलाकारों द्वारा श्री जैनेन्द्र दोस्त के निर्देशन में महान रंगकर्मी भिखारी ठाकुर के जीवन पर एकाग्र नाटक ‘भिखारीनामा’ का मंचन किया गया|
‘भिखारीनामा’ नाटक भिखारी ठाकुर के जीवन एवं उनके रंगकर्म पर आधारित नाटक है। इस नाटक मे भिखारी ठाकुर के जन्म से लेकर उनके नाच पार्टी बनाने तथा बिदेसिया एवं अन्य नाटक रचने तक की कहानी को दिखाया गया है। भिखारी ठाकुर के जीवन एवं रंगमंच के इस यात्रा में यह दिखाने का प्रयास किया गाय है कि किस तरह से भिखारी ठाकुर ने अपने आसपास के सामाजिक यथार्थ एवं जीवन अनुभवों को अपनी कला का मुख्य विषय बनाया है। इस नाटक में भिखारी ठाकुर के जीवन की मुख्यतः चार अवस्थाओं को प्रदर्शित किया गया है। पहली अवस्था यानि बाल्यावस्था में भिखारी ठाकुर के जन्म से ले कर उनके स्कूल जाने, गाय चराने की विभिन्न दृश्यों को गीत-संगीत के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसके बाद की कहानी में भिखारी ठाकुर युवावस्था में प्रवेश करते हैं। इस भाग में भिखारी ठाकुर के जातिगत पेशे (बाल काटना, दाढ़ी बनाना, चिट्ठी नेवतना आदि) के अनुभवों को दिखाया गया है। इसी क्रम में समाज के यजमानी व्यवस्था को भी दिखाया गया है। उसके अगले भाग में भिखारी ठाकुर की शादी तथा रोज़ी-रोटी के लिए उनके बंगाल विस्थापित होने के दृश्य को दिखाया गया है। भिखारी ठाकुर द्वारा बंगाल में बाल काटने, दाढ़ी बनाने, रामलीला देखने जैसे विभिन्न प्रसंगों से नाटक आगे बढ़ता है। इसी बीच भिखारी बंगाल से वापस अपने गाँव चले आते हैं तथा गाँव आ कर रामलीला करते हैं। उसके बाद नाच दल में जा कर कलाकारी करते हैं। इसके अगली कड़ी में भिखारी ठाकुर द्वारा अपने ख़ुद का नाच दल बना कर बिदेसिया, बेटीबेचवा, गबरघिचोर आदि नाटक प्रस्तुत करने का दृश्य मानचित किया गया है।
श्री जैनेन्द्र दोस्त “भिखारी ठाकुर रंगमंडल प्रशिक्षण एवं शोध केंद्र के फाउंडर डायरेक्टर हैं| इस रंगमंडल के माध्यम से जैनेन्द्र दोस्त लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के रंगमंच, गीत संगीत, नृत्य, वाद्ययंत्र को पुनर्जीवित एवं संस्थानीकृत कर रहे हैं| श्री जैनेंद्र दोस्त ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) दिल्ली के आर्ट एंड एस्थैटिक्स विभाग में लौंडा नाच एवं भिखारी ठाकुर पर पीएचडी किया है। तथा भिखारी ठाकुर के रंगसंगी रामचंद्र माँझी, शिवलाल बारी एवं लखिचंद माँझी से भिखारी ठाकुर के रंगमंच की बारीकियों को सिखा। जैनेन्द्र ने अब तक बीस से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है। इनके द्वारा निर्देशित नाटक एवं सांगीतिक कार्यक्रम न सिर्फ़ देश के प्रतिष्ठित रंग-महोत्सवों में बल्कि पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल एवं भूटान आदि देशों में भी मंचित हुए हैं। इस नाट्य प्रस्तुति के प्रमुख कलाकार श्री रामचंद्र मांझी आकर्षण का केंद्र रहे, क्योंकि वर्तमान में उनकी आयु लगभग 95 वर्ष की है किन्तु मंच पर उनका अभिनय एक युवा की भांती आकर्षित रहा| श्री रामचंद्र मांझी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के साथ ही पद्मश्री सम्मान भी प्राप्त हो चुका है|
प्रस्तुति में मंच पर- जैनेन्द्र दोस्त : सूत्रधार, सरिता साज़ : प्यारी सुंदरी/गायक, रामचंद्र माँझी कथावाचक/ गायक, शिवलाल बारी : कथा वाचक, शिव कुमार माँझी : हारमोनियम, संदीप कुमार : ढोलक, चन्द्रमा राम : बैंजू, बृजनाथ सिंह- कोरस पर थे|
मंच परे- प्रकाश विन्यास- शिव कुमार, सेट- रामलखन, मंच व्यवस्था- रंजीत कुमार राम एवं नाटककार, परिकल्पना एवं निर्देशन श्री जैनेन्द्र दोस्त का था|




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