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‘गमक’ अन्तर्गत नाटक ‘नकबेसर’ का मंचन
गमक श्रृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुतियों के अंतर्गत रवींद्र भवन में आज फणीश्वरनाथ रेणु की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर सघन सोसायटी फॉर कल्चरल एवं वेलफेयर, भोपाल के कलाकारों द्वारा आनन्द मिश्रा के निर्देशन में फणीश्वरनाथ रेणु द्वारा लिखित नाटक – नकबेसर की प्रस्तुति हुई|
यह नाटक फणीश्वरनाथ रेणु के आत्म-रेखाचित्र एक बुलन्द खुदी …. उर्फ मशहूर नकबेसर का किस्सा एंव पांडुलेख पर केन्द्रित है। रेणु जी ने आत्मकथा को इस प्रकार लिखा है वो इस रेखाचित्र के माध्यम से कहते हैं। कि जो चित्रगुप्त महाराज ने लिख दिया वही जीवन में उन्होने किया है। वो ये भी कहते है कि चित्रगुप्त ने उन्हे धरती की विषेश मांग पर भेजा है। वो पहले प्रकाशन से लेकर जीवन के संघर्ष जैसे मिठाई की दुकान की मैनेजरी, प्रतिष्ठित पुस्तकालय में लाइब्रेरियन, आल इंडिया रेडियो स्टुडेंट फेडरेशन किसान सभा देश की आजादी सशस्त्र क्रांति, गुरिल्ला लड़ाई, आजादी के लिये जेल जाना, लाठी खायी वो सब उनकी रचना प्रक्रिया में दिखता है। उनके जीवन में गांव में जो जीवन रस प्राप्त किया है वह भी रचनाओ मे रेखांकित होता हैं। उन्होने ये भी कहा है कि रेणु जी अपने आत्मकत्था मे सच ही लिखेगें ऐसा उन्होने अपने मित्रो को वचन दिया था।
प्रस्तुति में मंच पर: शिवेन्द्र सिंह, अजय दाहिया, प्रभाकर द्विवेदी, प्रदीप तिवारी, प्रफुल्ल तिवारी, मुकेश गौर, सुमुख मिश्र, आमिर रजाक, भूमिका ठाकुर, मोनिका विश्वकर्मा, रोहणी विश्वकर्मा एवं देवांश बघेल ने अभिनय किया एवं मंच परे: मंच व्यवस्थापक- हीरालाल चटर्जी, प्रकाश परिकल्पना- कमलेश वर्मा, वेशभूषा- रचना मिश्रा, रूप सज्जा- प्रतिमा यादव एवं ज्योति, मंच सामग्री- अजय, मंच आकल्पन- सुदेशना मिश्र, संगीत परामर्ष – सुरेन्द्र वानखेडे, संगीत संयोजन- आनंद मिश्रा एवं प्रफुल्ल तिवारी, संगीत संचालन- प्रसन्न सोनी, लेखन- फणीश्वरनाथ रेणु, परिकल्पना एवं निर्देशन- आनंद मिश्रा का था|




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