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‘गमक’ अन्तर्गत नाटक ‘डाकघर’ का मंचन
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित गमक श्रृंखला की सप्ताहांत प्रस्तुतियों के अंतर्गत रवींद्र भवन में आज मनोज कुमार मिश्रा के निर्देशन में विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की रचना ‘डाकघर’ का मंचन हुआ|
नाटक डाकघर का नायक अमल। वह जिज्ञासु बच्चा है जो मौत की ओर अग्रसर है। वह तो खेल सकता है। उसे बाहर की धूप और हवा से बचाकर रखा जाता है। वह नींद से बचा अपना समय खिड़की पर गुजारता है जहां आते-जाते लोगों से बातें कर वह अपना मन बहलाता है। इसी कड़ी में वह अपनी हमउम्र सुधा से भी मिलता है। दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो जाती है। अमल को यकीन रहता है कि उसके इलाज के लिए राजवैद्य आयेंगे और राजा पत्र लिखेंगे। अंत में एक दिन राजवैद्य आता है और राजा का पत्र भी लेकिन तब तक अमल इस दुनिया को छोड़ कर जा चुका होता है। नाटक का अंतिम संवाद दर्शकों को भावुक कर जाता है जिसमें सुधा कहती है कि जब अमल जाग जाएगा तो उससे कहना कि सुधा उसे भूली नहीं है।
विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में-
कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था और वह मानवता को विशेष महत्व देते थे। साहित्य, शिक्षा, संगीत, कला, रंगमंच और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अनूठी प्रतिभा का परिचय दिया। अपने मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण वह सही मायनों में विश्वकवि थे। साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने अपूर्व योगदान दिया और उनकी रचना गीतांजलि के लिए उन्हें साहित्य के नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
मंच पर– राजमणि तिवारी – वैद्य, पहरेदार, राजवैद्य, शंकरदयाल शर्मा – माधवदत्त, दहीवाला, विपुल सिंह – दादा, फकीर, अमित कुमार – सुधा, चौधरी, एवं मनोज कुमार मिश्रा – अमल के रूप में अभिनय किया|
मंच परे–
मंच परिकल्पना – मनोज कुमार मिश्रा, मंच परिकल्पना सहायक – राजमणि तिवारी, मंच सामग्री परिकल्पना एवं निर्माण- सुधीर सिंह, मंच सामग्री निर्माण सहायक – अमनप्रीत कौर, मंच सामग्री निर्माण सहयोगी – प्रसून, मानसी, वर्षा, प्रदीप, वेशभूषा परिकल्पना – राजमणि तिवारी, वेशभूषा परिकल्पना सहायक – वैष्णवी, सुमन, प्रीति, रूपसज्जा परिकल्पना – विपुल सिंह गहरवार, रूपसज्जा सहायक – सत्यम छेत्री, प्रकाश परिकल्पना – आनंद मिश्रा, प्रकाश परिकल्पना सहायक – अंकित मिश्रा, संगीत संकलन – संचालन एवम प्रॉम्टर- प्रसून मिश्रा प्रचार प्रसार एवं यात्रा व्यवस्थापक – शुभांक श्रीवास्तव, मंच व्यवस्थापक एवं प्रस्तुतकर्ता – विनोद कुमार मिश्रा, प्रस्तुति – मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केन्द्र रीवा (म.प्र.), रचयिता – गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और निर्देशक – मनोज कुमार मिश्रा का था|




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