कानूनी मोहर लगने के बाद तड़के फांसी पर लटका याकूब

मुंबई बम धमाकों में ढाई सौ से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले याकूब मेनन को सर्वोच्च न्यायालय ने तड़के चार बजकर पचपन मिनिट पर फांसी पर लटकाए जाने के अपने फैसले पर मोहर लगाई और इसके करीब डेढ़ घंटे बाद नागपुर जेल में उसे फांसी पर लटका दिया गया। इससे जहां भारत की न्याय व्यवस्था ने एकबार फिर साबित कर दिया कि किसी अपराधी को भी सजा दिए जाने के पहले उसकी दलीलों को पूरा सुना जाता है और फिर सजा सुनाई जाती है।
देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट फांसी होने के करीब साढ़े तीन घंटे पहले किसी केस सुनवाई के लिए अदालत में बैठी और दोषी व्यक्ति की दलीलों को सुना। तीन न्यायाधीशों दीपक मिश्रा, प्रफुल्ल पंत, अमिताव रॉयल की बैंच अलसुबह करीब तीन बजे सुप्रीमकोर्ट के लिए रवाना हुए और उन्होंने याकूब की फांसी पर रोक लगाने की दलील पेश करने वाले आनंद ग्रोवर, प्रशांत भूषण, इंदिरा जयसिंह को सुना। अंत में चार बजकर पचपन मिनिट पर सुप्रीमकोर्ट ने उनकी दलीलों में कोई नई बात नहीं होने की बात कहते हुए फांसी का फैसला बरकरार रखा।
वहीं तड़के साढ़े छह बजे नागपुर जेल में याकूब को फांसी दिए जाने के लिए रात से ही जेल प्रशासन की तैयारियां चल रही थीं। सुबह पांच बजे जब सुप्रीमकोर्ट का फैसला आया तो याकूब को उसके बारे में बताया गया। इसके बाद उसने नमाज पढ़ी और डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। निर्धारित समय पर उसे फांसी दे दी गई। इस बीच नागपुर और मुंबई में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया था और कड़ी सुरक्षा के इंतजाम थे।

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