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कला विविधताओं का प्रदर्शन ‘गमक’
संस्कृति संचालनालय द्वारा- आयोजित कला विविधताओं के प्रदर्शन ‘गमक’ के समापन दिवस,आज सुप्रसिद्ध मालवी गायक सुन्दरलाल मालवीय, उज्जैन द्वारा ‘मालवी गायन’ की प्रस्तुति हुई | मालवीय ने अपने चित-परिचित अंदाज में मालवा की ठेठ परम्परा में बहुविध गीतों का गायन किया|
शुरुआत में गणपति वंदना- कोठारी गादी पे नौबत बाजे से की| आगे माता का भजन- सागर में नूर दरसाया, भैरूजी भजन- भैरूजी लिप्या ने छाव्या, परबात्या – नानी मोटी खटोलड़ी ने, बना गीत- लगना मुलाया सवा लाख का हरीयाला बना, बना ख्याली- सड़क पर केसर की क्यारी, मामेरा – चाला म्हारा धोरी उतावला रे म्हारी बेन्या, विदाई – घड़ी एके घोड़िला थोवजा रे सायर बनड़ा,ऋतुगीत- आज इन्दर आया है धरती पे पामणा, घट्टी- बेड़ल्यो जो लई के, सावन गीत- सावन आयो म्हारा राज, भर्तृहरी गीत- चन्दरमा बिना कैसी चाँदनी और संकरर्या उत्सव गीत- अरेरे संकरर्या से प्रस्तुति का समापन किया।
श्री मालवीय को अनेकों सम्मान प्राप्त हैं, जिनमें वर्ष 2005 में डॉ. आंबेडकर नेशनल फेलोशिप सम्मान, अखिल भारतीय सिविल सेवा सर्विसेज, भोपाल द्वारा संगीत प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल एवं वर्ष2019 में कला मण्डली नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय कला साधक सम्मान आदि प्रमुख हैं|
प्रस्तुति में हारमोनियम पर – स्वयं श्री मालवीय, सह गायन में – श्री कबीर मालवीय, दुर्गेश बाली, कु. जयति मालवीय, और श्रीमती यशस्विनी मालवीय, ढोल पर- श्री गगन सिंह बेस, ढोलक पर श्री वीरेंद्र जॉनी एवं वायलिन पर श्री राधे पारस ने संगति दी|




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