कमलनाथ सरकार की नई रेत नीति से पांच गुना बढ़ा प्रदेश का राजस्व: शोभा

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्षा श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने बयान में कहा कि यह काबिले तारीफ है कि सत्ता में आने के एक वर्ष के भीतर ही कमलनाथ सरकार ने नई रेत नीति लागू कर, रेत उत्खनन के द्वारा प्राप्त राजस्व को 5 गुना बढ़ा दिया है। वहीं राजस्व बढ़ाने और अवैध उत्खनन रोकने में कमलनाथ सरकार को मिली सफलता से बौखलाए, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कह रहे हैं कि वे अवैध उत्खनन को रोकने के लिए “नर्मदा सेना” बनाएंगे। काश! ऐसी सेना उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बना ली होती तो रेत माफियाओं द्वारा प्रदेश को इस तरह से लूटा न गया होता, माफियाओं द्वारा नर्मदा नदी के बीचों-बीच सड़कें न बना ली गई होतीं, डंपर जैसे कांडों की गूंज न सुनाई दी होती और न ही नेताओं के घरों में नोट गिनने की मशीनों के चर्चे आम हुए होते।

आज जारी अपने बयान में शिवराज सिंह और भाजपा पर उक्त निशाना साधते हुए श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि जिस “नर्मदा सेना” के गठन की बात शिवराज सिंह कर रहे हैं, उसकी सर्वाधिक आवश्यकता तब थी, जब डेढ़ दशक पहले प्रदेश में “जंगलराज” शुरू हुआ था, अब ऐसी किसी सेना की आवश्यकता इसलिए नहीं है क्योंकि कमलनाथ जी के नेतृत्व में चल रही प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपने जल, जंगल, जमीन, खनिज और अन्य सभी संसाधनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

अपने बयान में श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि प्रदेश का राजस्व बढ़ाकर, उसके विकास की रफ्तार तेज करने के लिए कमलनाथ सरकार की प्रतिबद्धता का अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि नई रेत नीति के माध्यम से वर्ष 2019-20 का राजस्व 1234 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ है, जबकि पिछले वर्ष का राजस्व केवल 240 करोड रुपए ही आया था। यानि स्पष्ट है कि अपनी साफ नीयत के दम पर, केवल 1 वर्ष में ही कांग्रेस की नई सरकार ने, पिछली सरकार की अपेक्षा 5 गुना अधिक वार्षिक राजस्व प्राप्त कर लिया है। नई सरकार बनते ही, राजस्व के आंकड़ों में आए इस बड़े अंतर से प्रदेश की जनता के सामने यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपने इतने लंबे शासनकाल के दौरान शिवराज सिंह को “नर्मदा सेना” की याद क्यों नहीं आई?

अपने बयान के अंत में श्रीमती ओझा ने कहा कि “नर्मदा सेना” बनाने जैसी जुमलेबाजी करने की बजाय शिवराज सिंह को जनता के सामने इस बात का खुलासा करना चाहिए कि उनके शासनकाल में राजस्व की इतनी बड़ी हानि क्यों और कैसे हुई? प्रदेश के राजस्व में हुई इस हानि की राशि के लाभार्थी कौन-कौन थे? क्या तत्कालीन सरकार के संरक्षण के बिना ही इतना बड़ा खेल चल रहा था और कौन-कौन से नेताओं और माफियाओं की जेसीबी, पोकलेन और डंपर, रात-दिन रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन कर, नर्मदा सहित प्रदेश की अन्य नदियों को खोखला करने में लिप्त थे? प्रदेश की जनता इन सवालों का जवाब जानने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही है।

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