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कमलनाथ ने भाजपा को चौथी बार पटखनी दी
मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को बार-बार अल्पमत की सरकार बताकर कभी भी गिराने की धमकी देने वाली भाजपा बुधवार को उस समय विधानसभ में हतप्रभ रह गई जब दंड विधि संशोधन विधेयक पर मत विभाजन हो गया और आसंदी से यह घोषणा की कि गई पक्ष में 122 मत पड़े हैं। इस पर संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने इस पर चुटकी ली कि हमारे लिए यह अच्छा है कि संशोधन विधेयक का हमारे साथ बीजेपी को दो विधायकों ने भी पक्ष में मतदान कर दिया।
यह सुनकर भाजपा विधायक दल सन्न रह गया और कुछ देर उन्हें समझ ही नहीं आया। बाद में खुलासा हुआ कि नारायण त्रिपाठी और शरद कोल नाम के पुराने कांग्रेसी विधेयक के पक्ष में वोट डाले हैं तो भाजपा ने कहा कि यह पहली बार देखा गया कि जिस विधेयक में विपक्ष समर्थन दे रहा है उसमें सरकार मत विभाजन करा रही।
गौरतलब है कि इसके पहले विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने वोटिंग से अपना बहुमत सिद्ध करते हुए अपने दो विधायकों को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाए। फिर अनुपूरक मांगों में इसी तरह कांग्रेस ने बहुमत सिद्ध किया। आज की रणनीति भी कांग्रेस की बहुमत सिद्ध करने की थी जो विपक्ष के पीछे हटने की वजह से एक विधेयक को निशाना बनाकर भाजपा को असत्य साबित कर दिया।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुमत सिद्ध करने के बाद मीडिया से कहा कि पिछले 6 माह से भाजपा रोज कहती रही कि हमारी सरकार अल्पमत की सरकार है।आज जाने वाली है ,कल जाने वाली है।ऐसा वो रोज़ कहती थी। आज भी सुबह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमें इशारा मिल जाए तो हम आज सरकार गिरा दे।मैंने उन्हें उसी समय आमंत्रित किया विश्वास प्रस्ताव के लिए लेकिन उन्होंने मेरा प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। मैंने सोच लिया कि हम बहुमत सिद्ध कर देंगे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो जाए।
आज हुआ मतदान सिर्फ एक विधेयक पर मतदान नहीं है। यह बहुमत सिद्ध का मतदान है।भाजपा के दो विधायक नारायण त्रिपाठी व शरद क़ौल ने हमारे पक्ष में मतदान किया है। हम उनका स्वागत करते हैं। वोट देने वालों ने आत्मा की आवाज सुनी। आज हमें 122 विधायकों का समर्थन प्राप्त हो गया है। हमने अपना बहुमत सिद्ध कर दिखाया।




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