कठपुतली कलाओं पर एकाग्र पुतुल समारोह में पंचतंत्र की कथाओं की प्रस्तुति दी गई

जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र पुतुल समारोह का आयोजन 20 से 24 अक्टूबर, 2021 तक आयोजित किया जा रहा है। कठपुतली के माध्यम से ऐतिहासिक और पौराणिक चरितों एवं कथा-कहानियों को दिखाया जाता है।

वर्तमान समय में इस कला में समकालीन विषयों को भी आधार रूप में ग्रहण किया गया है जिससे युवा पीढ़ी को सदियों से चली आ रही इस विधा और इसके माध्यम से जीवन मूल्यों को संरक्षित करने की विधि को बताया जा सके। समारोह में प्रस्तुतियां प्रतिदिन सायं 6.30 बजे से हो रही है। समारोह के तीसरे दिन 22 अक्टूबर को छड़, मपेट और कंटम्प्रेरी शैली में सोने की चूड़ी और पिंजरे में शेर की प्रस्तुति नई दिल्ली के अक्षय भाट एवं साथियों द्वारा दी गई। सोने की चूड़ी पंचतंत्र की कहानी पर आधारित रही। एक जंगल का राजा शेर, जिसे एक दिन सोने की चूड़ी मिलती है और चूड़ी के माध्यम से जगंल के जानवरों को अपने चंगुल में फंसाना चाहता है लेकिन जानवरों को उस चूड़ी से किसी तरह का कोई संबंध नहीं रहता है और ना ही जानवरों को कोई लालच होता है। शेर के कई बार प्रयास करने के बाद भी कोई जानवर उसके चंगुल में नहीं फंसता है। कथा के अगले दृश्य में दिखाया कि शेर सोचता है कि जानवर को छोड़ अब इंसान को लालच दी जाए। वह एक ऐसे रास्ते में जाकर बैठ जाता है जहां से मनुष्य का आना-जाना होता है। सोने की चूड़ी देखकर लोगों में लालच आ जाता है। जिससे कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और एक दिन वह शेर गांव में जाकर लोगों को लालच देने का प्रयास करता है एवं कई लोग लालच में आकर परेशानी को मोल ले लेते हैं। अंत में गांव वालों को बचाने एक चालाक लोमड़ी आती है जो कुएं में शेर को उसकी परछाई दिखाती और वह शेर कुएं में कूद कर प्राण त्याग देता है। वह लोमड़ी शेर से गांव वालों को बचा लेती है। कथा लालच बुरी बला है का संदेश देती है। दूसरी प्रस्तुति पिंजरे में शेर कथा की दी गई। पंचतंत्र की कथा पर आधारित प्रस्तुति में एक शेर कई दिनों से पिंजरे में कैद होता है और उस स्थान से एक पंडित जी रोज निकला करते थे। एक दिन शेर, पंडित जी से कहता है कि तुम्हारे माथे में तिलक है और मेरे मस्तक पर भी तिलक है। मैं ब्राह्मण और तुम भी ब्राह्मण, तो कर दो मेरा कल्याण। पंडित जी डरते हुए शेर का पिंजरा खोल देते हैं। वह शेर कई दिनों से भूखा होता है जो पंडित जी एवं वहां के लोगों को खाने का प्रयास करता है। कथा के अंत में एक चतुर बंदर शेर को वापस पिंजरे में बंद कर देता है। ये प्रस्तुतियां लगभग एक घंटे की रही। जिसमें मपेट, छड़, दस्ताना, स्ट्रिंग के साथ अन्य प्रकार की लगभग 15 कठपुतली का प्रयोग किया गया। प्रस्तुति में निकेतन भाट, लकी भाट, रोहन भाट, वरूण भाट, लक्ष्य भाट, शंभू भाट एवं अभिषेक भाट ने संगत की।

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