जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कठपुतली कला की विविध शैलियों पर एकाग्र पुतुल समारोह का आयोजन 20 से 24 अक्टूबर, 2021 तक आयोजित किया जा रहा है। कठपुतली के माध्यम से ऐतिहासिक और पौराणिक चरितों एवं कथा-कहानियों को दिखाया जाता है। वर्तमान समय में इस कला में समकालीन विषयों को भी आधार रूप में ग्रहण किया गया है जिससे युवा पीढ़ी को सदियों से चली आ रही इस विधा और इसके माध्यम से जीवन मूल्यों को संरक्षित करने की विधि को बताया जा सके। समारोह में प्रस्तुतियां प्रतिदिन सायं 6.30 बजे से हो रही है।
समारोह के पहले दिन 20 अक्टूबर 2021 को धागा, कन्टम्प्रेरी और छड़ शैली में श्रवण कुमार की कथा एवं जयश्रीकृष्णा की कथा की प्रस्तुति जयपुर के बिल्लूराम भाट एवं साथी द्वारा दी गई। प्रस्तुति की शुरूआज श्रवण कुमार की कथा से हुई जिसमें आदर्श पुत्र श्रवण की कहानी को कठपुतलियों के माध्यम से प्रस्तुत की गई। कहानी की शुरूआत सतयुग काल से होती है। देवी ज्ञानवाणी एवं ऋषि शान्तनु कुमार की संतान नहीं होती है इसलिए लोग उनका अपमान करते हैं। संतान प्राप्ति के लिए दोनों भगवान की उपासना और तपस्या करते हैं। देवी ज्ञानवाणी एवं ऋषि शान्तनु कुमार से नारद आकर कहते हैं कि आप दोनों को पुत्र की प्राप्ति होगी लेकिन पुत्र प्राप्ति के बाद आपकी आँखों की ज्योति चली जाएगी और कुछ दिनों के बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है जिनका नाम श्रवण कुमार रखा गया। बड़े होकर श्रवण माता-पिता को काबड़ यात्रा कराते हैं। अवध यात्रा के दौरान श्रवण का स्वर्गवास हो जाता है। यह प्रस्तुति लगभग एक घंटे की रही। दूसरी प्रस्तुति जय श्रीकृष्णा की दी गई। इस कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में कृष्ण जन्म, गोकुल में उल्लास और उमंग, पूतना वध, माखन चोरी एवं राधा -कृष्ण मधुर मिलन लीला को प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति 30 मिनट की रही। दोनों प्रस्तुति में लगभग 15 अलग अलग कठपुतली का प्रयोग किया गया। प्रस्तुति के दौरान बिल्लूराम भाट, अशोक भाट, शिशुपाल भाट, किशन भाट, अनुराग भाट, बंटी भाट एवं बंसीलाला भाट ने संगत किया।
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