ऐसी आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को राहत मिले

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोरोना के मौजूदा संकट से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। मजदूरों, छोटे व्यवसायियों आदि की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अत: प्रदेश में तुरंत ऐसी आर्थिक गतिविधियों प्रारंभ की जाना चाहिएं, जिससे अधिक से अधिक व्यक्तियों को इनका लाभ मिल सके। प्रदेश में रोजगार के अतिरिक्त अवसर जुटाने होंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव श्री मनीष रस्तोगी आदि उपस्थित थे।

छोटे व्यवसायियों को मिले राहत

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में में 01 करोड़ 17 लाख गरीब परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े हैं तथा इन्हें लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा 32 लाख अन्य श्रेणियों के व्यक्तियों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है। हमें छोटे व्यवसायियों, मॉल आदि में काम करने वाले कर्मचारियों, फूल एवं सब्जी के किसानों आदि की भी चिंता करनी होगी। इनके लिए रोजगार के अवसर जुटाने होंगे। ऐसे छोटे स्वरोजगारी जो किसी भी योजना में सहायता हेतु पात्र नहीं है उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की सहायता दी जा सकती है।

महिला स्व-सहायता समूहों को ऋण उपलब्ध कराएं

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह विभिन्न आर्थिक गतिविधियों का अच्छी तरह संचालन करती हैं तथा उससे बहुत से परिवारों का भरण-पोषण होता है। महिला स्व-सहायता समूहों को न केवल उनकी गतिविधियां संचालित करने के लिए ऋण दिलवाए जाएं, अपितु उनका सामान बेचने के लिए भी उनकी मदद की जाए। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों को रोजगार मिलेगा।

निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को जो जिले कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं वहां प्रथमत: जल संसाधन विभाग तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ कराए जाएं। प्रत्येक ठेकेदार को निर्देशित किया जाए कि वे गाइड लाइन का पालन करें तथा मजदूरों से सामाजिक दूरी बनवाते हुए कार्य करवाएं। इसके लिए उन्हें बार-बार सलाह दी जाए। चरणबद्ध तरीके से मनरेगा के कार्य भी प्रारंभ कराए जाएं।

भारत सरकार द्वार दी जाने वाली सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनातंर्गत स्वीकृत पैकेज को 3 माह से बढ़ाकर 6 माह किए जाने, नियोक्ता एवं कर्मचारी भविष्य निधि अंशदान की राशि का 3 माह के स्थान पर 6 माह का भुगतान किए जाने, 15 हजार तक वेतन पाने वाले सभी कर्मचारियों को इसका लाभ दिए जाने तथा जनधन खाताधारक महिलाओं के समान अन्य जनधन खाताधारकों को भी 500 रूपए की वित्तीय सहायता की 3 माह की सुविधा दिए जाने की अनुशंसा की जा सकती है।

शहरी क्षेत्रों की गरीब बस्तियों में कैंटीन सुविधा

शहरी क्षेत्रों की गरीब बस्तियों में कैंटीन सुविधा तथा स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड से प्रवासी एवं कमजोर वर्ग के लोगों के खाने एवं ठहरने की व्यवस्था भी की जा सकती है।

पहले जैसा ही रहे सिबिल स्कोर

ऐसे ऋणी जो लॉकडाउन के कारण अपनी किस्त जमा नहीं कर सके हैं, का बैंकों द्वारा लॉकडाउन से पहले का सिबिल स्कोर बनाए रखना चाहिए। अर्थात विलंब से ऋण का भुगतान करने पर उन्हें किसी प्रकार का घाटा नहीं होना चाहिए। आरबीआई द्वारा जारी रेग्यूलेटरी पैकेज की अवधि को 3 से बढ़ाकर 6 माह किया जाना चाहिए। नए उद्यमियों को बगैर कोलेटेरल के 10 लाख तक के ऋण देने के प्रावधान को बढ़ाकर 25 लाख किया जाना चाहिए।

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