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एनएफएआई प्रदर्शनी ने भारतीय सिनेमा की समृद्धि एवं विविधता प्रदर्शित की
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री वेंकैया नायडू ने कहा है कि सिमकॉन 2016 के दौरान एनएफएआई द्वारा आयोजित प्रदर्शनी स्वतंत्रता की लड़ाई एवं उसके बाद की विभिन्न लड़ाइयों की दिशा में हमारे सैनिकों, हमारे लोगों एवं स्वाधीनता सेनानियों के योगदान को रेखांकित करने वाली फिल्मों को प्रदर्शित करती है। प्रदर्शनी में छुआछूत, महिला उत्पीड़न, जाति व्यवस्था आदि जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई भी विभिन्न फिल्मों के माध्यम से व्यापक रूप से प्रदर्शित की गई है। भारतीय फिल्म उद्योग 42000 से अधिक फिल्मों के साथ सबसे विविध उद्योगों में से एक है, जिसने देशभक्ति की दिशा में बेशुमार योगदान दिया है। प्रदर्शनी में इसे भी व्यापक रूप से दर्शाया गया है।
भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार ने नई दिल्ली में आयोजित 28वें राज्य सूचना मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान ‘ आजादी 70 साल-याद करो कुर्बानी’ की थीम पर मल्टी मीडिया प्रदर्शनी आयोजित की है। इस प्रदर्शनी में स्वाधीनता की दिशा में भारतीय फिल्म उद्योग के योगदान को प्रदर्शित किया गया है और इसका आयोजन देश की आजादी के 70वें वर्ष का समारोह मनाने के लिए किया गया है। इस प्रदर्शनी को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड का नाम है ‘ उत्थान एवं विद्रोह : समाज सुधार का सिनेमा’। इसमें स्वाधीनता से पूर्व के समय की फिल्मों और जाति तथा वर्ग विभाजनों, छुआछूत के खिलाफ संघर्ष, महिलाओं की भागीदारी आदि जैसे सामाजिक मुद्धों की दिशा में उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया है। दूसरा खंड ‘हमारे स्वाधीनता सेनानी-सिनेमा के आईने से’ महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, अंबेदकर, वीर सावरकर, रानी लक्ष्मी बाई एवं अन्य स्वाधीनता सेनानियों की जीवनियों को प्रदर्शित किया गया है। तीसरा खंड ‘हमारे जवानों को सलाम’ स्वाधीनता संग्राम एवं उसके बाद की विभिन्न लड़ाइयों में हमारे सैनिकों के योगदान को एक श्रद्धांजलि है। इस प्रदर्शनी की व्यापक रूप से सराहना की गई है जिसमें आजादी से पूर्व एवं आजादी के बाद की देशभक्ति फिल्मों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है।
एनएफएआई ने इसकी पुणे की सुविधाओं के परिसर को प्रदर्शित करने के लिए दिल्ली में वचुर्अल रियल्टी अनुभव की भी स्थापना की है। इस अनुभव में प्रदर्शनी का एक वर्चुअल टूर भी शामिल है।




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