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उच्चतम न्यायालय ने संसद से गंभीर और साधारण बाल अपराधों के अंतर पर फिर विचार करने को कहा।
उच्चतम न्यायालय ने सरकार से कानून के नये सिरे से दोबारा जांच करने को कहा है ताकि हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में शामिल कोई भी किशोर अपराधी सजा से बच न पाए। न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और पी.सी. पंत की पीठ ने कल सरकार से इस बात का पता लगाने को कहा कि क्या निरोधात्मक असर पैदा करने के लिए विभिन्न कानूनों में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं?
न्यायालय की पीठ ने कहा कि दुष्कर्म, डकैती, हत्या, और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल किशोर अपराधियों द्वारा समाज के सामने उत्पन्न किए गए खतरे के प्रति आंखें बंद रखकर नहीं बैठा जा सकता। न्यायालय ने कहा कि दुष्कर्म, हत्या और डकैती जैसे जघन्य अपराधों में नाबालिगों के लिए होने वाली बढ़ती घटनाओं के कारण किशोर न्याय ( बच्चों की देखभाल और संरक्षण अधिनियम -2000) में परिवर्तन करने की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। न्यायालय की पीठ ने सरकार से गंभीर और हानिरहित बाल अपराधों के बीच अंतर की फिर समीक्षा करने को कहा है।




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