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उच्चतम न्यायालय ने मानहानि से संबंधित दंड कानूनों की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की है।
उच्चतम न्यायालय ने मानहानि से संबंधित दंड कानूनों की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी० पंत की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में प्रतिष्ठा का अधिकार भी शामिल है।
न्यायालय चौबीस याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है जिनमें आरोप लगाया है कि दंडात्मक अनुमति अधिनियम के प्रावधानों से संविधान से मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है। कई राजनेताओं और जाने-माने व्यक्तियों ने ये याचिकाएं दायर की हैं।
केन्द्र और कुछ राज्य सरकारों ने यह कहते हुए इन याचिकाओं का विरोध किया कि इनकी दलीलें मान लेने से समाज में अराजकता की स्थिति पैदा होगी, क्योंकि लोग बेखौफ दूसरों की प्रतिष्ठा धूमिल करेंगे।




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