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इंदौर प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष खारीवाल की सदस्यता स्माप्ती पर स्टे
इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान में वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल की सदस्यता समाप्त करने के मामले में रजिस्ट्रार, फम्र्स एवं संस्थाएं, मप्र स्थगन आदेश दे दिया है। उल्लेखनीय है कि इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी की अध्यक्षता में 5 जून 2017 को संपन्न हुई क्लब की प्रबंधकारणी समिति की बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष खारीवाल की सदस्यता समाप्त करते हुए उपाध्यक्ष पद को रिक्त घोषित कर दिया था। इस बैठक में एकाएक यह मसला उठा था जिसमें कहा गया था कि आठ वर्ष पूर्व खारीवाल को चेक अनादरण के मामले में कोर्ट उठने तक की सजा हुई थी। इस आधार पर उन्हें इंदौर प्रेस क्लब का सदस्य बने रहने का हक नहीं है। कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने खारीवाल की सदस्यता समाप्त कर दी थी। इंदौर प्रेस क्लब ने सदस्यता समाप्त करने की अधिकृत जानकारी खारीवाल को नहीं देते हुए यह सूचना सीधे सहायक पंजीयक फम्र्स एवं संस्थाएं को दी। खारीवाल ने अपनी सदस्यता समाप्त करने के मामले में रजिस्ट्रार, फम्र्स एवं संस्थाएं, मप्र के समक्ष अपील की। अभिभाषक आशुतोष नीमगांवकर के माध्यम से दायर याचिका में निष्कासन के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि ५ जून की बैठक के एजेंडे में खारीवाल की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव नहीं था और न ही सदस्यता समाप्त करने संबंधि उन्हें कोई सूचना पत्र जारी किया गया।रजिस्ट्रार आलोक नागर ने तमाम दलीलें सुनने के बाद ९ नवंबर को जारी स्थगन आदेश में खारीवाल के निष्कासन को प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध बताया। आदेश में कहा कि इंदौर प्रेस क्लब के महासचिव को सदस्यता समाप्त करने व पद रिक्त घोषित करने का अधिकार नहीं है। उल्लेखनीय है कि इंदौर प्रेस क्लब में सदस्यता समाप्ती की सूचना खारीवाल को नहीं देते हुए सीधे सहायक पंजीयक कार्यालय को दे दी थी। रजिस्ट्रार ने सदस्यता समाप्त करने से पहले अपीलार्थी को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाने पर भी ऐतराज व्यक्त किया। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है। पूर्व में भी दो मर्तबा इसी आधार पर सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद इसी मामले में हाईकोर्ट और रजिस्ट्रार, फम्र्स एवं संस्थाएं, मप्र खारीवाल के पक्ष में फैसला सुना चुकी है। खारीवाल का कहना है कि इंदौर प्रेस क्लब के विधान में आपराधिक प्रकरण में सजा होने पर सदस्यता समाप्त होने का प्रावधान है लेकिन जिस प्रकरण का हवाला देकर बार-बार उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है वह प्रकरण चेक अनादरण का होकर आर्थिक लेन-देन से संबंधित है।इस मामले की एक अपील हाई कोर्ट , इंदौर में भी लम्बित है।उधर, मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसले में चेक अनादरण के मामले को आपराधिक प्रकरण नहीं माना है।




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