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इंदौर की भारी-भरकम टीम, फिर भी कमलनाथ का इंदौर नेगेटिव कनेक्शन… पढ़िये रिपोर्ट
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी और पीसीसी चीफ कमलनाथ के बंगले की टीम में इंदौर के भारी-भरकम लोग हैं लेकिन वहीं उनकी दो बार नेगेटिव पब्लिसिटी हुई। इतने वजनदार लोगों की टीम भी इंदौर में अपने नेता कमलनाथ के लिए पॉजिटिव माहौल बना नहीं पाई है। पढ़िये रिपोर्ट की कौन कौन हैं पीसीसी व उनके बंगले की टीम में इंदौर और उस शहर से सीधे जुड़े लोग।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी और उसके अध्यक्ष कमलनाथ के बंगले की टीम में इंदौर या उस शहर से जुड़े बड़े-बड़े नाम के नेता व असरदार लोग हैं जिनमें प्रवीण कक्कड़, अभय तिवारी, केके मिश्रा, शोभा ओझा, सज्जन सिंह वर्मा, विनय बाकलीवाल, संजय शुक्ला और विशाल पटेल जैसे नाम शामिल हैं। इनमें प्रवीण कक्कड़ पीसीसी चीफ के मुख्य सलाहकार की अघोषित भूमिका में माने जा रहे हैं और इंदौर के हर छोटे-बड़े मामले में उनकी बात को प्रमुखता से लागू किया जाता है। दूसरा नाम अभय तिवारी का जो आईटी विभाग के प्रमुख हैं और पीसीसी मुख्यालय में उनका कोई कक्ष नहीं है, कमलनाथ के बंगले से ही वे पीसीसी के आईटी विभाग को देखते हैं। तीसरा नाम केके मिश्रा का है जो पीसीसी मीडिया विभाग के अध्य़क्ष हैं व भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पर सीधे हमले बोलते रहते हैं। करीब पचास साल से वे इंदौर में सक्रिय राजनीति से जुड़े हैं। चौथा नाम शोभा ओझा का है जो इंदौर में 2003 से 2008 के बीच तीन चुनाव लड़ चुकी हैं व महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीसीसी मीडिया विभाग प्रमुख रह चुकी हैं। पांचवां नाम सज्जन सिंह वर्मा का है जो कमलनाथ के सबसे पुराने विश्वस्त नेता व विधायकों में से एक हैं व दिग्विजय-कमलनाथ सरकारों में मंत्री भी रहे। इसी तरह विनय बाकलीवाल, विधायक संजय शुक्ला-विशाल पटेल जैसे नेता इंदौर के रग-रग से वाकिफ हैं।
सिख समाज के बाद पत्रकार की नाराजगी
कमलनाथ के पास इंदौर से जुड़े इतने बड़े-बड़े नाम हैं लेकिन इसके बाद भी उन्हें एक बार नहीं दो बार वहां अलग-अलग समूह की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। पहले सिख समाज के आयोजन में उन्हें पीठ पीछे समाज के लोगों की नाराजगी झेलना पड़ी थी और उस घटना के बाद कमलनाथ के कई सालों से विश्वस्त रहे मौजूदा मीडिया सलाहकार नरेंद्र सलूजा को पार्टी छोड़ना पड़ी थी। इस बार एक समाज के कार्यक्रम में कमलनाथ को उपरोक्त लोगों की टीम के बावजूद खुद मंच संभालना पड़ा जिसमें पत्रकारों की नाराजगी झेलना पड़ी।




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