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आरएनटीयू द्वारा वूमन सोशल एंटरप्रेन्योरशिप पर दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वूमन एंटरप्रेन्योरशिप का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभारंभ शुक्रवार को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की डायरेक्टर प्रो. शालिनी भरत, आईसेक्ट समूह के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ चतुर्वेदी एवं आईसेक्ट समूह की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी ने किया। यह कॉन्फ्रेंस टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई के सेंटर फॉर सोशल एंटरप्रेन्योरशिप एवं एआईसी-आरएनटीयू फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित की जा रही है।
इस दौरान उद्घाटन सत्र में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की डायरेक्टर प्रो. शालिनी भरत ने अपने वक्तव्य में महिला एंटरप्रेन्योर्स को अधिक सहुलियत एवं सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की बात कही ताकि वे बराबरी से आगे बढ़ सकें। साथ ही उन्होंने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा काम कर रही बहुत सी महिलाओं को अक्सर एंटरप्रेन्योर्स में गिना नहीं जाता जो कि उनकी संभावनाओं को सीमित कर देता है।
इसके बाद आईसेक्ट समूह की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी ने कहा कि वूमन एंटरप्रेन्योरशिप एक प्रमुख विषय और मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए जिससे इस पर अधिक विमर्श और अधिक से अधिक कार्य किया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए उनके परिवार की ओर से सहयोग दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए इस समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया कि अक्सर देखा जाता है व्यवसाय की ओनर महिला होती है परन्तु उसे पुरुष द्वारा पूरी तरह
चलाया जा रहा होता है, जिसमें बदलाव की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र के दौरान आईसेक्ट समूह के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं को आपेक्षित प्रतिनिधत्व अब तक नहीं मिला है जिसकी वे हकदार हैं। इसी कारण उन्हें लगातार बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही महिलाओं का प्रतिशत 25 से 40 प्रतिशत तक है जो कि अन्य क्षेत्र की अपेक्षा बेहतर है परंतु इसे सभी क्षेत्रों में बढ़ाए जाने की जरूरत है। सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने महिला एंटरप्रेन्योर्स को बढ़ावा देने के लिए कई सुझाव भी दिए जिनमें उन्होंने महिलाओं के लिए अवॉर्ड्स, महिला केन्द्रित हैकाथॉन्स, आईडियाथॉन्स, एप मेकिंग चैलेंजेस को लगातार एवं अधिक संख्या में कराए जाने की बात कही।
इसके बाद ‘एंटरप्राइज, वूमन एंड इम्पैक्ट’ विषय पर विशेषज्ञ सत्र का आयोजन हुआ जिसमें जयपुर रग्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर एन.के. चौधरी ने व्यवसाय को चलाने के कई सुझाव साझा किए एवं “मन चाहा प्रोजेक्ट” पहल के बारे में बताया। इसके बाद जयपुर रग्स फाउंडेशन के स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट पार्टनर एवं सस्टेनेबिलिटी लीड यश रंगा ने अपने वक्तव्य में जयपुर रग्स के बिजनेस मॉडल की चर्चा की जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह वे ग्रास रूट लेवल को इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
दूसरे विशेषज्ञ सत्र में ‘बिजनेस मॉडल एवं इंक्लूजन’ विषय पर विमर्श हुआ जिसमें फ्रंटियर मार्केट्स की सीईओ एवं फाउंडर अजइता शाह एवं ‘उद्योगिनी’ की संस्थापक और जाग्रति ग्रुप ऑफ इनिशिएटिव्स की बोर्ड मेंबर वनिता विश्वनाथ ने व्यवसाय को बढ़ाने एवं महिलाओं की भागीदारी पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। इस दौरान सत्र का संचालन एस.पी. जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च की एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. निरजा मट्टू ने किया। कॉन्फ्रेंस में छात्र, शिक्षक एवं एंटरप्रेन्योर्स द्वारा बड़ी संख्या में भागीदारी की गई।




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