आने वाले समय में रेडियो रियल गेम चेंजर साबित होगाः प्रो. के.जी. सुरेश

लोक प्रसारक के रूप में रेडियो की भूमिका सबसे अहम है और आने वाले समय में यह रियल गेमचेंजर साबित हो सकता है। रेडियो की लोकप्रियता बढ़ाने में प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का भी बहुत बड़ा योगदान है। एफएम चैनलों ने भी रेडियो की प्रासंगिकता को बनाए रखने और लोगों के दिलों स्थापित करने में महती भूमिका निभाई है।

यह बात बुधवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश ने पीआईबी भोपाल सभागार में विश्व रेडियो दिवस के संदर्भ में, ‘मन का रेडियो’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कही। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम रेडियो का ऐसा कार्यक्रम है जिसे टेलिविजन चैनल भी प्रसारित करते हैं और यह आम जन में बहुत लोकप्रिय है। इसने रेडियो की लोकप्रियता को नया आयाम दिया है। प्रो. सुरेश ने कहा कि रेडियो बहुत ही सस्ता और बेहद विश्वसनीय माध्यम है। कम्युनिटी रेडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थानीय लोगों द्वारा स्थानीय भाषा में उनकी पसंद की बात करता है।

सेमिनार को संबोधित करते हुए जनसंपर्क विभाग, मध्य प्रदेश के सचिव सुदाम खाड़े ने कहा कि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में रेडियो हमें खुद को सुनने का मौका देता है। यह खुद से कनेक्ट करने का बेहतर माध्यम है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान भोपाल में फेक न्यूज पर लगाम लगाने में रेडियो द्वारा निभाई गई भूमिका को भी याद किया और कहा कि बिना रेडियो के सहयोग के यह काफी मुश्किल होता। उन्होंने कहा कि कम्यूनिटी रेडियो आर्थिक उत्थान का बेहतर साधन है। उन्होंने कहा कि रेडियो लोगों के दिलों से जुड़ने का सबसे बेहतर तरीका है।

पीआईबी, भोपाल के अपर महानिदेशक प्रशांत पाठराबे ने कहा कि रेडियो का देश के दूराज इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ एक मजबूत रिश्ता है। यह बेहद ही आसान तरीके और जनता की भाषा में लोगों तक बातों को पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राजस्व के मामले में रेडियो को नुकसान तो हुआ पर कोरोना के बाद रेडियो ने काफी बेहतर तरीके से वापसी की है और इसका राजस्व 5 गुना बढ़ा है।

शोध पत्रिका ‘समागम’ के संपादक मनोज कुमार ने सामुदायिक रेडियो के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों को याद किया और कहा कि कम्युनिटी रेडियो भविष्य का रेडियो है। उन्होंने कम्युनिटी रेडियो खोलने की पूरी प्रकिया के बारे में भी बताया और इस बारे में सरकारी गाइडलाइन की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कम्युनिटी रेडियो शिक्षा की रोशनी फैलाने में अहम योगदान देता है। उन्होंने शोध पत्रिका ‘समागम’ के फरवरी अंक (कम्युनिटी रेडियो को समर्पित) का भी जिक्र किया।

आकाशवाणी, भोपाल के कार्यक्रम प्रमुख विश्वास केलकर ने लोक प्रसारक के रूप में रेडियो की भूमिका पर प्रकाश डाला। आकाशवाणी समाचार भोपाल के पूर्व संवाददाता और आरओबी, भोपाल के सहायक निदेशक शारिक नूर ने खबरों की दुनिया में रेडियो की विश्वसनीयता के बारे में बात की। माय एफएम के कार्यक्रम प्रमुख विकास अवस्थी ने कहा कि रेडियो आपका दोस्त बनकर आपके साथ चलता है और आपकी सकारात्मकता को बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाता है। बिग एफएम की रेडियो जॉकी अनादि ने कहा कि रेडियो साधारण और बहुत ही आसान माध्यम है। रेडियो की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हमें कानों से देखना सिखाता है। हम काम करते हुए भी रेडियो से जुड़ सकते हैं।

सेमिनार में कम्युनिटी रेडियो को समर्पित शोध पत्रिका ‘समागम’ के फरवरी अंक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन पीआईबी, भोपाल के निदेशक अखिल नामदेव ने किया। कार्यक्रम का पीआईबी, भोपाल के यूट्यूब चैनल, ट्वीटर और फेसबकु पर सीधा प्रसारण किया गया।

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