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आईएनएस विक्रांत में लगे बिजली के तारों बिछ सकती है कोचि से काशी तक लाईन
भारतीय नौ सेना के आईएनएस विक्रांत के नए स्वरूप की कई खासियत है और इसकी विकरालता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि इसमें प्रयुक्त बिजली के तारों की लंबाई इतनी है कि उनसे कोचि से लेकर काशी तक बिजली की लाइन बिछाई जा सकती है।
आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी विराटता का उल्लेख करते हुए यह कहा। आईएनएस विक्रांत में 16 बिस्तर के अस्पताल की सुविधा भी है। इसका आकार करीब साढ़े बारह हजार वर्गमीटर है तथा इस पर एकसाथ 20 फाइटर प्लैन आ सकते हैं और मात्र तीन सेकंड में इस पर लैंडिंग हो सकती है। 45000 टन वजनी इस आईएनएस विक्रांत 61 साल बाद नए स्वरूप में आया है। 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चार मार्च को समर्पित किया था तो आज इसके नए संस्करण को प्रधानमंत्री मोदी ने नौ सेना को सौंपा है।
2003 में बनना शुरू हुआ
आईएनएस विक्रांत के नए संस्करण को 2003 में बनाए जाने को हरी झंडी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दी थी। इसे 2012 में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हुई। 20 हजार करोड़ रुपए की लागत के इस नए संस्करण की लंबाई 262 मीटर है जबकि पुराने आईएनएस की लंबाई 210 मीटर की थी। पुराना विक्रांत ब्रिटेन से खरीदा गया था और आज का विक्रांत पूरी तरह से स्वदेशी है।




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