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अर्जुन ताल में पारंपरिक कथक नृत्य, पारंपरिक गणेश परन का प्रदर्शन
एकाग्र ‘गमक:रंग मध्यप्रदेश’ श्रृंखला अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन संगीत एवं कला अकादमी द्वारा आज को सुश्री हर्षिता शर्मा, इंदौर की ‘कथक’ नृत्य की प्रस्तुति संयोजित की गई | प्रस्तुति की शुरुआत शिव वंदना से हुई, जिसमे अर्जुन ताल 24 मात्रा में पारंपरिक कथक नृत्य और पारंपरिक गणेश परन का प्रदर्शन किया,
इसमें कथक के विलुप्त होने वालों अंगों का भी उपयोग किया गया| तत्पश्ताप अर्जुन ताल में ही विलुप्त हो चुके संच, सुलप, आदि अंगों से युक्त थाट, आमद, तोडे, परन, कवित्त आदि के पश्चात तीन ताल द्रुत लय में गतविकास व लड़ी के साथ गुरु डॉ. पुरु दाधीच द्वारा लिखी गई रचना ‘अर्धनारीश्वर’ से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया|
सुश्री हर्षिता शर्मा भारत के युवा कथक नर्तकों में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखती हैं| आपने पदमश्री डॉ. पुरु दाधीच एवं डॉ. विभा दाधीच से कथक की शिक्षा प्राप्त की| सुश्री शर्मा ने नई दिल्ली में पांच वर्षों तक गुरु प्रेरणा श्रीमाली एवं गुरु राजेंद्र गंगानी से भी कथक की शिक्षा प्राप्त की है|
प्रस्तुति में पढ़ंत पर म.प्र. शिखर सम्मान से सम्मानित डॉ विभा दाधीच जी, तबला पर श्री राहुल बेने, गायन व हारमोनियम पर मयंक स्वर्णकार एवं सितार पर श्रीमती स्मिता बाजपेयी ने संगति दी|




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