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अब 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा विधेयक पास
भोपाल के शक्ति कांड के बाद मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जताई गई महिला सुरक्षा की चिंता पर सोमवार को विधानसभा में दंड विधि संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया। इसमें 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी तो छेड़छाड़ का अपराध गैर जमानती होगा और दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 साल की सजा का प्रावधान है। यह विधेयक पारित कर राज्य सरकार केंद्र सरकार को भेजेगी। मप्र देश का पहला राज्य होगा जिसने दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा के प्रावधान का विधेयक पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ऐसे नराधम जो मासूम बेटियों से
दुराचार करते हैं उन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है, उन्हें फांसी की सजा मिलना चाहिए। इसके लिये विधेयक पारित कर प्रदेश की विधानसभा नया इतिहास रच रही है। इस विधेयक के लिये राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त करने के लिये भरसक प्रयास किये जायेंगे। मुख्यमंत्री चौहान आज यहां विधानसभा में दण्ड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2017 पर हुई चर्चा के दौरान
संबोधित कर रहे थे। इस विधेयक को आज प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित किया गया।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में समाज और सरकार मिलकर एक सामाजिक नैतिक आंदोलन चलायेंगे, जो बेटियों के प्रति गलत मानसिकता को दूर करेगा। जब तक बेटी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होगी, तब तक बोझ मानी जाती रहेगी। बेटियों के प्रति दुराचार जैसे अपराध मानवता के खिलाफ अपराध है। सभ्य समाज सभ्य इंसानों के लिये होता है और जिनमें मानवता नहीं है उन्हें मानव कैसे माना जाये। मानव अधिकार मानवों के लिये होते हैं नर पिशाचों के लिये नहीं। बलात्कार करने वाले अपराधी नर पिशाच हैं। समाज को गंभीरता से विचार करना होगा कि नारी केवल भोग्या नहीं है। बारह वर्ष तक की अबोध मासूम बेटियों से बलात्कार करने वालों को फांसी की सजा मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह विधेयक बेटियों को बचाने के लिये है। जिस समाज में स्त्रियों का सम्मान नहीं होता वहां देवता नहीं रहते। हमारे यहां हजारों वर्ष से महिलाओं के सम्मान की बात की गयी है। पुरुष प्रधान मानसिकता से बेटे की चाहत बढ़ी है तथा सामाजिक विकृति आयी है। बेटी के साथ अन्याय हो जाये तो समाज के देखने की दृष्टि बदल जाती है। बेटी बोझ मानी जानी लगी और बेटों की संख्या बढ़ती गई। इस स्थिति से पूरा देश और समाज चिंतित है। राज्य सरकार की बेटियों को वरदान बनाने की कई योजनाएं इसी संवेदनशीलता से
उपजी हैं। आज के परिदृश्य में बेटियों की सुरक्षा की समस्या एक चुनौती है। उनके साथ होने वाले अपराध मानवता के खिलाफ अपराध हैं। नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान तथा बाद में कई सभाओं में इस बारे में बात की है कि मासूम बेटियों के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। ऐसे अपराधी इस धरती पर जीने योग्य नहीं है। मृत्यु की सजा का प्रावधान होगा तो अपराधियों में डर रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी विकास से आज बच्चों के सामने मोबाईल और अन्य माध्यमों से अश्लील सामग्री परोसी जा रही है, जिससे वे प्रभावित होते हैं। इस विधेयक के माध्यम से हम एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहते हैं। बेटियों के साथ दुराचार की अधिकांश घटनाएं परिचितों और रिश्तेदारों द्वारा की जाती है। इस तरह के विश्वासघात करने वाले लोग जीने लायक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों का भावनात्मक शोषण के बाद उन्हें भटकने के लिये छोड़ देने वाले भी अपराधी हैं। समाज को इस पर भी गंभीरता से विचार करना होगा। राज्य
सरकार द्वारा एक जनसुरक्षा विधेयक लाया जायेगा जिसमें बेटियों की सुरक्षा से संबंधित सुझाव शामिल किये जायेंगे।
चौहान ने कहा कि आज पारित विधेयक के माध्यम से हम विचार की शुरुआत कर रहे हैं। इस विधेयक के दुरुपयोग को रोकने के सुरक्षात्मक उपाय किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि कानून के साथ एक नैतिक और सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता भी है। इस विधेयक में कोचिंग क्लास जाने वाली बेटियों का पीछा करने वाले और साइबर क्राइम से उन्हें परेशान करने वालों के विरुद्ध दण्ड का प्रावधान किया गया है। इसमें दूसरी बार अपराध करने पर गैर जमानती
अपराध और सात साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। इस विधेयक से बनने वाला कानून उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। इसमें छेड़छाड़ की घटनाओं को गैर-जमानती और दोबारा अपराध पर दस साल की सजा का प्रावधान किया गया है। यह दण्ड विधेयक एक सद्इच्छा से लाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेटिय़ों की सुरक्षा के लिये स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, महिला कण्डक्टर होने, गर्ल्स होस्टल में प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा महिला वार्डन रखने जैसे उपाय किये हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को निर्देश दिये जायेंगे कि वे अनाथ बालक-बालिकाओं के रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था करें। मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिये हम सब मिलकर मध्यप्रदेश में एक नैतिक अभियान चलायेंगे।




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