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अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़े लोगों का 10 अप्रैल को बंद
अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम में बदलाव के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दो अप्रैल को दलितों से जुड़े लोगों के आव्हान पर हुए भारत बंद के बाद अब फैसले के साथ खड़े लोग 10 अप्रैल को बंद करने जा रहे हैं। हालांकि इस बंद से कई सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करने वाले संगठन व लोगों ने हाथ खींच लिया है। इसके बाद भी प्रदेश के अधिकांश जिलों में पुलिस मुख्यालय ने विशेष सतर्कता बरती है और 10 अप्रैल, आंबेडकर जयंती व परशुराम जयंती तक विशेष सुरक्षा इंतजाम का दावा किया जा रहा है। मप्र के सवर्ण सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सपाक्स संस्थान की नीति निर्धारण समिति ने फैसला लिया है कि 10 अप्रैल के भारत बंद से उनका कोई संबंध नहीं है। सपाक्स के राजीव शर्मा ने बयान जारी करते हुए यह ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि न तो उनकी संस्था का पहले बंद से कोई संबंध था न आने वाली 10 अप्रैल के बंद से है।
दो सरकारी अफसरों पर एफआईआर
दो अप्रैल को हुए दंगों में बालाघाट के दो सरकारी अधिकारियों को ड्यूटी छोड़कर प्रदर्शन में शामिल होने पर प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया है। बालाघाट के सहायक अाबकारी अायक्त बृजेंद्र कोरी और खनिज अधिकारी सोहन सोलंकी सालमे बहाने से ड्यूटी छोड़कर चले गए थे। बाद में जब वीडियो फुटेज सामने आए तो दोनों अधिकारियों के दृश्य भी वायरल वीडियो फुटेज भी सामने आए। इस कारण इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
ग्वालियर-चंबल में 90 एफआईआर
वहीं दो अप्रैल को ग्वालियर और चंबल संभाग में भड़के दंगों में पुलिस ने अब तक 90 एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 45 ग्वालियर और भिंड-मुरैना में 33-12 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में पुलिस ने 236 लोगों की गिरफ्तारी की है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिए हैं कि वे सोशल मीडिया व अन्य तरह के प्रचार माध्यमों पर चलने वाली खबरों पर विशेष नजर रखें। प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करें।
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