अजयसिंह ने लोकयुक्त से मिलकर शपथ पत्र सहित शिकायत की

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने आज सुबह लोकयुक्त से मिलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराजसिंह चैहान, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, उमाशंकर गुप्ता और विश्वास सारंग के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करने के लिए शपथ पत्र सहित शिकायती पत्र दिया है। पत्र में लिखा है कि इन सभी ने अपने लोकसेवक होने का दुरुपयोग किया हैद्य उन्होंने लोक कर्तव्य का पालन नहीं किया हैद्य यह कृत्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा सात के अंतर्गत अपराध हैद्य साथ ही धारा आठ के अंतर्गत दंडनीय हैद्य इसमें सात वर्ष का कारावास और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है।

अजयसिंह ने लिखा है कि इन सभी ने कांग्रेस के 22 पूर्व विधायकों को पद देने का प्रलोभन देकर बदले में कांग्रेस के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार गिराने का कृत्य किया हैद्य अखबारों में प्रकाशित खबरों और आम चर्चा के अनुसार उन्हें प्रलोभन दिया गया कि सभी को न केवल भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ाया जाएगा बल्कि 12 लोगों को मंत्री भी बनाया जाएगा। विभाग भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की इच्छा से दिये जाएँगे, साथ ही कुछ राशि भी दी जाएगी।
सिंह ने लिखा है कि योजनाबद्ध तरीके से 22 विधायकों को बेंगलोर ले जाकर प्रेस्टीज गोल्फ लिंक रिसार्ट में रखा गयाद्य किसी से मिलने नहीं दिया गया और फोन जब्त कर लिए गएद्य उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में भाजपा शासन हैद्य सभी के स्तीफे भूपेंद्र सिंह के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष को भिजवाए गएद्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजयसिंह जब उनसे मिलने गए तो पुलिस प्रशासन ने अंदर नहीं जाने दियाद्य प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि ये सभी विधायक, ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा नेता सरकार गिराने का षड्यंत्र कर रहे थेद्य जो कांग्रेस सरकार गिरने पर सिद्ध हो गयाद्य
अजयसिंह ने लिखा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि वादे के अनुसार 14 ऐसे व्यक्तियों को जो विधायक नहीं थे, मंत्री बना दिया गयाद्य ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा से राजयसभा सदस्य चुने गएद्य उन्हें केंद्र में मंत्री पद से नवाजे जाने की पूरी संभावना हैद्य उपचुनाव में स्तीफा देने वाले सभी लोगों को भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया हैद्य तुलसी सिलावट, गोविंदसिंह राजपूत, प्रभुराम चैधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, हरदीपसिंह, राज्यवर्धन सिंह, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया, गिर्राज दंडोतिया, एदलसिंह कंसाना और बिसाहूलाल सिंह ने सरकार गिराने के प्रतिफल के रूप में मंत्री पद प्राप्त कियाद्य जाहिर है सभी ने लोक कर्तव्य का पालन अनुचित रूप से और बेईमानी से कियाद्य इस तरह उन्होने षड्यंत्र सिद्ध कर दिया।

सिंह ने अगली वस्तुस्थिति बताते हुये लिखा है कि विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी को शिवराज सिंह चैहान ने लालच दिया और उनसे स्तीफा दिलाकर तत्काल नागरिक आपूर्ति निगम का चेयरमेन बना दियाद्य इसके बाद नारायण पटेल और सुमित्रा देवी कासडकर के भी स्तीफे दिलाये गए जो कांग्रेस के विधायक थेद्य मंत्री बनाए गए लोगों के अलावा स्तीफा देने वाले लोगों में मनोज चैधरी, जसपाल सिंह जज्जी, जसवंत जाटव, संतराम सिरोनिया, मुन्नालाल गोयल, रणवीर सिंह जाटव, कमलेश जाटव और रघुराज कंसाना भी शामिल थेद्य अजयसिंह ने लिखा है कि कांग्रेस के 25 पूर्व विधायकों के स्तीफा देने के कारण उपचुनाव हो रहे हैं जिसके लिए ये सभी जिम्मेदार हैंद्य अकारण चुनाव थोपे जाने के फलस्वरूप करोड़ों रुपयों के शासकीय धन का जो अपव्यय हो रहा है, वह इन सभी से वसूला जाये।
सिंह ने लिखा है कि षड्यंत्र में शामिल सभी लोग अंततरू विगत 20 मार्च को चुनी हुई कमलनाथ सरकार गिराने में सफल रहेद्य मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्तीफा दियाद्य ताबड़तोड़ 23 मार्च को शिवराजसिंह को शपथ दिलाई गई और फिर पूरे भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा कर दी गईद्य संभवतरू लाकडाउन लगाने में विलंब इसलिए किया गया क्योंकि भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस सरकार गिराना थी। सरकार गिरने के बाद जो घटनाक्रम हुआ उससे प्रकाशित खबरें और आम चर्चा सच साबित हुई।
सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करते हुये लिखा है कि धारा सात के अंतर्गत यदि कोई लोक सेवक लाभ के पद के लिए लोक कर्तव्य का पालन अनुचित रूप से और बेईमानी से करता है या करवाता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा कृत्य करने के लिए यदि वह कोई इनाम लेता है या लाभ की प्रत्याशा में लोक कर्तव्य का निर्वहन नहीं करता है तो इस अपराध के लिए कम से कम तीन साल से सात साल तक का कारावास और जुर्माने का भागी होगाद्य लोक कर्तव्य में बेईमानी के लिए प्रेरित करने वाले पर भी यही सजायेँ लागू होती हैं। इन प्रावधानों से स्पष्ट है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलकर शिवराजसिंह चैहान, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, उमाशंकर गुप्ता, सुदर्शन गुप्ता और विश्वास सारंग ने षड्यंत्र पूर्वक कांग्रेस सरकार गिरायी है। अपने लोक सेवक होने का दुरुपयोग किया हैद्य लोक कर्तव्य का पालन नहीं किया है जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध है।

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