मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के नजदीक आते-आते भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरी पार्टियां भी दम भरने लगी हैं। दिल्ली के सीएम केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से लेकर तेलंगाना सीएम केसीआर की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रदेश में समाज-जाति में प्रभाव रखने वालों को अपने साथ लेकर हुंकार भरने की कोशिश कर रही हैं। बीआरएस में कांग्रेस से नाराज व्यापमं के व्हीसिलब्लोअर डॉ. आनंद राय-कुछ जयस कार्यकर्ताओं के साथ जाने के बाद आप ने भी यादव समाज में पैठ रखने वाले चार बार के विधायक मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह के पिता अखंडप्रताप सिंह को अपने साथ कर लिया है। पढ़िये क्या है राजनीति समीकरण।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 का कांग्रेस की तरफ से सोमवार को नर्मदा पूजन के साथ प्रियंका गांधी ने बिगुल बजा दिया है। वहीं, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विभिन्न वर्गों के लिए रोजाना कोई न कोई घोषणा कर चुनावी शंखनाद कर रहे हैं और इसी महीने जल्द ही भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाकर चुनावी मोड में आ जाएगी। इसी चुनावी राजनीति में अब तीसरी शक्ति के रूप में राजनीतिक दल व गैर राजनीतिक संगठन भी सक्रिय होने लगे हैं।
आदिवासी सरकार के वादे पर बीआरएस मध्य प्रदेश में
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने पिछले दिनों अपनी तेलंगाना राष्ट्र समिति पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए भारत राष्ट्र समिति का रूप दे दिया है और उसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उतारने के लिए उन राज्यों में प्रभाव रखने वाले नेताओं को अपने साथ जोड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश में उन्होंने आदिवासियों के युवा संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति जयस के प्रमुख पदाधिकारियों को चर्चा के लिए बुलाया था और इनमें से कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी को ज्वाइन भी कर लिया है। बीआरएस से जुड़े दिग्विजय समर्थक रहे डॉ. आनंद राय ने मध्य प्रदेश में आदिवासी सरकार का नारा देते हुए ट्रायबल के लिए कई लोक लुभावन वादों के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर ली है। आम आदमी पार्टी में चार बार एमएलए रहे अखंड जुड़े आम आदमी पार्टी ने मध्य प्रदेश में 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन तब उसे विशेष मत नहीं प्राप्त हुए थे। मगर पिछले दिनों हुए नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों ने खासा प्रदर्शन किया और सिंगरौली में आप की नगर पालिका बनने से पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव 2023 में विशेष ध्यान दिया है। सिंगरौली महापौर रानी अग्रवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर संगठन में बदलाव किया और सोमवार को प्रदेश के वरिष्ठ नेता और चार बार विधायक रहने वाले अखंड प्रताप सिंह को पार्टी ज्वाइन कराई है।
1977 में पहली बार विधायक और फिर मंत्री रहे अखंड
अखंड प्रताप सिंह वैसे मार्च में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात कर चुके थे लेकिन वहां बातचीत में विशेष सफलता नहीं मिलने पर आप का दामन थामा है। अखंड प्रताप सिंह बहुजन समाज पार्टी से भी चुनाव लड़ चुके हैं। अखंड प्रताप सिंह 1977 में पहली बार विधायक चुने गए थे और दो बार कांग्रेस, एक बार भाजपा व एक बार निर्दलीय विधायक बन चुके हैं। वे मंत्री भी रह चुके हैं और 2008 में उमा भारती के अपनी नई पार्टी बनाने पर उनके खिलाफ भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था जिसमें उनकी जमानत जप्त हो गई थी।
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