रिहाई मंच ने चित्रकूट जिला जेल में मेराजुद्दीन, मुकीम और अंशू दीक्षित की हत्या पर सवाल किया कि आखिर जेल में कैसे पहुंचा हथियार, वह भी कोराना काल में जब मुलाकात तक बंद है और कैदी अलग-अलग जगहों पर बंद थे। नाइन एमएम की पिस्टल की बात प्रमुखता से आई है तो वहीं जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि कैंदियों में बहस रुकवाने पहुंचे जेल स्टाफ से अंशु ने सर्विस रिवाॅल्वर छीन ली थी। यह भी कहा जा रहा है कि अंशु ने मेराजुद्दीन को मारा फिर मुकीम को। यह भी कहा जा रहा है कि मुकीम को मारने के बाद मेराजुद्दीन के विरोध करने पर उसको मारा। सच के लिए इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के सिंटिग जज के निर्देशन में न्यायिक जांच होनी चाहिए। इसलिए कि अंशु दीक्षित के मारे जाने को लेकर कहा जा रहा है कि उसने कुछ कैदियों को बंधक बना लिया था जिसके बाद पुलिसिया कार्रवाई में वह मारा गया। इस बात पर संदेह पैदा होता है। ऐसा तो नहीं कि तीनों पुलिसिया कार्रवाई में मारे गए और फिर कहानी बनाई गई। जिस तरह मीडिया में आ रहा है कि दोनों को मारते हुए अंशु ने क्या बोला वह एक अच्छी कहानी हो सकती है पर संदेह से परे नहीं। क्योंकि या तो अंशु ने कोई बयान दिया हो पर इसकी कोई बात नहीं आई। यह दूसरा मामला है। ठीक इसी तरह बागपत जेल में नाइन एमएम की पिस्टल से सुनील राठी पर मुन्ना बंजरगी की हत्या का आरोप है।
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