किताबों का विकल्प डिजिटल मीडिया नहीं है। दिमागी सोच का दायरा किताबों से ही बढ़ाया जा सकता है। किताब ही उसका माध्यम है। किताबें हमेशा प्रासंगिक रहेंगी और हमें किताबों के पास जाना पड़ेगा। यह विचार आईसेक्ट ग्रुप ऑफ यूनिवर्सिटीज की निदेशक डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने चेंजिंग लैंडस्केप इन मॉडर्न लाइब्रेरियनशिप विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में व्यक्त किए।
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