जनजातीय कार्य विभाग के वन्या प्रकाशन द्वारा शुक्रवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल सेंटर में जियोग्राफिक इंडिकेशन (जी.आई.) पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। ‘जियोग्राफिक इंडिकेशंस चैलेंजेस एंड द वे फॉर्वर्ड’ विषय पर आयोजित इस सेमिनार में दिल्ली से आए जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री रजनीकांत ने कहा कि भारत की जीआई ही सोने की चिड़िया है। यही जीआई भारत की आत्मा भी है जिसे संरक्षित व संवर्धित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हमने देशभर के 75 उत्पादों का जीआई रजिस्ट्रेशन किया है। यही जीआई प्रोडक्ट्स पहले देश की जीडीपी का बड़ा हिस्सा हुआ करते थे जिसका व्यापार करने के लिए पूरी दुनिया भारत की ओर आती थी।
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