हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की बातों को लेकर राजनीतिक रणनीतिकार अतुल मलिकराम ने कहा है कि यह भारत की अनेकता में एकता पर चोट होगी। हिंदी भाषी राज्यों में ही हिंदी के प्रयोग को पहले अपनाना होगा और इसके लिए हिंदी के आसान-उच्चस्तर के शब्दों का ईजाद करना होगा। हिंदी के ज्यादा से ज्यादा उपयोग तब हिंदी को राष्ट्रभाषा से ऊपर विश्वभाषा की सोचना चाहिए।
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